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Saturday, 22 September 2018

नीशेप क्‍लीनिक (सैक्‍सी नाभी) नेवेल कार्क से नाभी को गहरा सुन्‍दर बनाना


नेवेल कार्क से नाभी को गहरा सुन्‍दर बनाना
महिलाओं में नाभी र्दशना वस्‍त्रों के पहनने के कारण गहरी नाभी का महत्‍व काफी बढ गया है । नाभी को आकार में कुछ चौडा एंव गहरा कराने हेतु नीशेप पार्लर में नेवेल कार्क एंव नेवेल स्प्रिंग की सहायता से गहरा बिना किसी आपरेशन के आसानी से किया जाता है । गहरी नाभी की बात ही कुछ और होती है , वही सकरी या फिर कम गहरी नाभी देखने में सुन्दर नही दिखती , नाभी को गहरा करने के लिये उपयोग में आने वाले कार्क को नेवेल कार्क कहते है । नेवेल कार्क एक साधरण सा कार्क है जिसे नाभी के अन्‍दर डाला जाता है ताकि नियमित रूप से कार्क के दबाब के कारण वहॉ के मसल्‍स अन्‍दर की ओर धस जाते है इससे नाभी एक गहरा आकार ले लेती है । नेवेल कार्क उपलब्‍ध न हो तो इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है । 


नेवेल कार्क बनाने की विधि :- नेवेल कार्क बनाना बहुत ही आसान है , इसे केवल इस प्रकार से बनाना होता है जिसमें नाभी पर नियमित दबाब बना रहे ताकि कार्क के दबाब के कारण नाभी अन्‍दर को दब जाये जिससे नाभी के अन्‍दर के मसल्‍स दबकर एक निश्चित आकर ले लेते है । नेवेल कार्क को बनाने के लिय बजार से जिस साईज की नाभी को आकार व गहराई देना हो उस साईज के प्‍लास्टिक के मोती को खरीद ले या फिर बच्‍चे जो कॉच की गोलीयॉ खेलते है इसे ले ले दोनो ही बजार में अलग अलग साईज के आसानी से उपलब्‍ध हो जाते है । इसके बाद इसे फिट करने के लिये आप एक रूपये साईज के सिक्‍के की साईज का या इससे थोडी बडे साईज एल्‍युमिनियम के गोल साईज का वृत के आकार की बस्‍तु को ले जिसके बीचों बीच एक छोटा सा छिद्र ताकि उसके उपर प्‍लास्टिक के मोती या कॉच की गोली को आसानी से इस प्रकार रखा जा सके ताकि वह इधर उधर गिरे नही । अब इसे आप क्‍युफिक्‍स या बजार में प्‍लास्टिक को चिपकाने वाले जो पदार्थ मिलते है उससे उसे उस जगह पर लगा कर चिपका दे बस आप का नेवेल कार्क तैयार हो गया । इस चित्र में देखिये आप को सारी जानकारीयॉ हो जायेगी ।
इस प्रकार से आप घर पर नेवेल कार्क को आसानी से बना सकते है । यहॉ पर जो चित्र दिया है उसमें एल्‍युमोनियम की एक गोल प्‍लेट है जिसके छिद्र पर प्‍लास्टिक के मोती को चिपका दिया गया है । आप चाहे तो इसकी जगह कॉच की गोली को भी चिपका सकते है कॉच की गोली की चिकनी होती है इससे त्‍वचा पर किसी प्रकार के निशान आदि बनने की संभावना कम होती है ।
नेवेल कार्क का उपयोग :-  नेवेल कार्क का उदेश्‍य केवल इतना होता है कि वह नाभी पर दबाब बना सके इस दबाब की बजह से नाभी का आकार एंव गहराई इसके नियमित कुछ दिनों तक प्रयोग करने से बढ जाती है । अब आप को इसे नाभी पर इस प्रकार से लगाना है ताकि प्‍लास्टिक या कॉच की गोली नाभी के अन्‍दर हो एंव एलुमोनियम प्‍लेट बाहर की तरफ अब इसे अंगुलिये से इतना दबाये ताकि कार्क याने प्‍लास्टिक या कॉच की गोली नाभी के अन्‍दर पूरी तरह से फिट हो जाये । यह गिरे नही इसके लिये आप धॉव पर लगाने बाली बैंडेज जो चिपकती है उसे इस प्रकार से लगाये ताकि वह नाभी के पास की त्‍वचा पर इस प्रकार से चिपक जाये ताकि यह कार्क गिरे नही । नियमित कुछ दिनों तक इसी प्रकार से अपनी सुविधानुसार इसे लगाते रहे । जब नाभी गहरी हो जाये एंव आकार में गोल चौडी हो जाये तो आप चाहे कि इसकी गहराई और आकार को और बडी करना है तो आप उस साईज के कार्क का उपयोग कर सकते है । आप अपने नीशेप पार्लर में इस प्रकार के कार्क को बना कर बेच भी सकते है यह बनाने में बहुत आसान है तथा इसका मूल्‍य आप को आप के मन के मुताबिक नाभी पर लगाने पर मिल सकता है । नेवेल कार्क का प्रयोग नियमिल लम्‍बे समय तक करने से नाभी का आकार स्‍थाई रूप से गहरा हो जाता है । अ
 
आज कल युवा महिलाओं में नाभी र्दशना वस्‍त्रों के पहने के कारण गहरी नाभी का अधिक महत्‍व बढा है हर महिला चाहती है कि उसकी नाभी गहरी सुन्‍दर हो परन्‍तु सभी महिलाओं की नाभी गहरी सुन्‍दर नही होती । कई महिलाओं की नाभी ,सकरी ,कम गहरी , फिर उसमें नाभी धारीयॉ स्‍पष्‍ट रूप से दिखलाई देती है इससे नाभी का सौन्द्धर्य जाता रहता है गहरी नाभी ही सुन्‍दर नाभी होती है ।
आज कल फैशनपरास्‍ती परिवारों में छोटी बच्‍चीयों की नाभी की तरफ ध्‍यान दिया जाने लगा है इसलिये वे बच्‍चीयों की नाभी को गहरा सुन्‍दर बनाने के लिये पहले से ही नेवेल कार्क या नेवेल स्प्रिंग का उपयोग करने लगी है । नाभी को गहरा सुन्‍दर आकार देने का कार्य नी शेप पार्लर या नेवेल क्‍लीनिक में होता है ।
सावधानीया:- 1- नेवेल कार्क की साईज इतनी होना चाहिये ताकि नाभी पर लगाने में आसानी से नाभी के अन्‍दर चली जाये , कार्क इस प्रकार का ना हो जिससे त्‍वचा आदि छिले , कार्क को व नाभी को दो तीन दिन बाद निकालते रहना चा‍हिये एंव सफाई करते रहना चाहिये ।


2- कार्क को चिपकाने वाले बैन्‍डेज मेडिकेटेड होना चाहिये तथा इसे खीच कर इस प्रकार से न लगाये जिससे त्‍वचा में अनावश्‍यक खिचाव हो यदि खीच कर चिपकाया जाता है तो इससे नाभी के आस पास की त्‍वचा पर झुरूरीयॉ पड सकती है जिससे वहॉ की त्‍वचा एकदम खराब दिखेगी । इसलिये हमेशा इस बात को ध्‍यान में रखते हुऐ इसे चिपकाये । चिपकने वाले बैंडेज को लगाने का केवल इतना उदेश्‍य होता है ताकि कार्क गिरे नही । कार्क को चिपकाने के बाद कार्क के उपर से आप जो भी वस्‍त्र पहनते है उसे कार्क की प्‍लेट के उपर रखे ताकि कार्क गिरे नही एंव कार्क पर नियमित दबाब बना रहे । आप चाहे तो उपर से रिबिन आदि भी बॉध सकते है इससे एक तो कार्क गिरेगा नही दूसरा कार्क पर नियमित दबाब बना रहेगा इस दबा की वजह से नाभी को गहरा होने में मदद मिलेगी ।
नेवेल कार्क को नाभी के अन्‍दर लगा कर उसे इस प्रकार से किसी चिपकने वाले बैन्‍डेज से चिपका देते है ।




सुलभ नाभी उपचार& वीडियो


                           सुलभ नाभी उपचार
 चिकित्‍सा जैसा पुनित कार्य आज एक व्‍यवसाय बन चुका है इसके लिये हम मरीज स्‍वयम जबाबदार है क्‍योकि जब तक हमें चिकित्‍सकों द्वारा परिक्षण व उपचार के बडे बडे परचे नही पकडा दिये जाते हमे विश्‍वास ही नही होता । आज से पहले भी कई उपचार विधियॉ प्रचलन में थी परन्‍तु मुख्‍य धारा से जुडी चिकित्‍सा पद्धतियों के वार्चस्‍व की वजह से सस्‍ती सुलभ उपचार विधियॉ लुप्‍त होती चली गयी और बची खुची कसर पाश्‍चात चिकित्‍सा पद्धतियों के जानकारों ने इसे अवैज्ञानिक एंव तर्कहीन कह कर पूरी कर दी । इसके पीछे भी कई कारण एंव हमारी अपनी मानसिकता भी जबाबदार रही है । यदि आप से कोई कहे की इस बिमारी का उपचार बिना किसी दबादारू के हो जायेगा, तो आप विश्‍वास नही करेगे , क्‍योकि आपको तो बडे बडे डॉ0 के बडे बडे परिक्षणों एंव उपचार की लत लग चुकी है । चलों हम मान लेते है कि बडे बडे डॉ0 के उपचार से आप ठीक हो जायेगे, परन्‍तु कभी कभी बडे से बडा डॉ0 भी जिस बीमारी का उपचार नही कर सकते उसे परम्‍परागत उपचारकर्ता आसानी से ठीक कर देते है इस प्रकार के कई उदाहरण भरे पडे है । मुक्षे अच्‍छी तरह से ज्ञात है हमारे पडोस में एक महिला के पेट में र्दद रहता था उसका उपचार बडे से बडे डॉ0 द्वारा किया जा रहा था परन्‍तु उसे किसी भी प्रकार का आराम नही मिल रहा था । चूंकि मरीज एक मध्‍यम वर्गीय परिवार से था, उपचार  मे अत्‍याधिक खर्च होने की वजह से घर का खर्च चलाना मुस्‍किल हो गया था इसलिये उन्‍होने उपचार कराना बन्‍द कर शासकीय चिकित्‍सालय में जो दबाये मिलती थी उसी पर निर्भर रहना शुरू कर दिया था, इस उपचार से उसे कुछ तो राहत मिल जाती थी परन्‍तु जैसे ही दबाओं का असर कम होने लगता था र्दद पुन: चालू हो जाता था । एक दिन वह महिला उसी महिला के पास गई जिसने उपचार से पूर्व कहॉ था कि हम आप के पेट के र्दद को नाभी के स्‍पंदन को यथास्‍थान बैठा कर ठीक कर देगे और आप की बीमारी ठीक हो जायेगी । परन्‍तु उस महिला के पति ने मना कर दिया था एंव बडी बडी चिकित्‍सालयों में उसका उपचार चला परन्‍तु किसी प्रकार का लाभ न होने पर एंव आर्थिक‍ि रूप से परेशान होने के बाद उसे उस महिला की याद आई तो उसने सोचा कि चलों इसे ही दिखला दिया जाये । उस बूढी महिला ने उसकी नाभी के स्‍पंदन को देखा जो टली हुई थी महिला ने उसके पेट पर तेल लगा कर पेट का मिसाज कर नाभी स्‍पंदन को यथास्‍थान बैठालने का प्रयास किया परन्‍तु रोग पुराना होने के कारण नाभी स्‍पंदन अपनी जगह पर ठीक से बैठ नही रही थी इसलिये उसने नाभी पर एक जलता हुआ दिया रखा फिर उपर से खाली लोटे को रखा इससे लोटे पर वेक्‍युम के कारण लोटा पेट पर चिपक गया एंव खिसकी हुई नाभी अपनी जगह पर आ गयी । इस उपचार से महिला के पेट का र्दद कम तो हो गया, परन्‍तु पूरी तरह से ठीक नही हुआ था इसलिये उसने कच्‍चे छोटे छोटे सात नीबूओं को फ्रिजर में रखवाया एंव दूसरे दिन एक एक नीबूओं को सीधे लेट कर नाभी पर रखते जाने की सलाह दी एंव यह उपचार नियमित रूप से सात दिनों तक करने से वह महिला पूरी तरह से रोगमुक्‍त हो गयी । अब आप ही विचार किजिये यदि उस महिला ने पहले या बडे बडे डॉ0 के उपचार के साथ ही यह उपचार करा लिया होता तो वह इतना परेशान न होती । अब इसी उपचार को वैज्ञानिक तरीके से देखा जाये तो यहॉ पर उस महिला के पेट के अंतरिक अंग सुसप्‍तावस्‍था में आ गये थे चूंकि किसी भी प्रकार की बीमारी के पूर्व शरीर के अंतरिक अंग पहले सुसप्‍तावस्‍था में आते है जो अपना सामान्‍य कार्य या तो कम करते है या फिर कभी कभी सामान्‍य अवस्‍था की अपेक्षा तीब्रता से करने लगते है दोनो अवस्‍थाओं में रोग की उत्‍पति होती है । प्राकृतिक रूप से किसी भी प्रकार के रोग होने पर शरीर स्‍वयम उसके उपचार की प्राकृतिक व्‍यवस्‍था करता है , जिस जगह पर किसी भी प्रकार की बीमारी होती है शरीर पहले वहॉ की समस्‍त आवश्‍यकताओं की पूर्ति बढा देता है ठीक उसी प्रकार जैसे किसी शहर में कोई अपदा या अनहोनी की स्थिति में शासन उस शहर को सवेदनशील घोषित कर समस्‍त आवष्‍यकताओं की पूर्ति करता है ठीक इसी प्रकार शरीर के किसी हिस्‍से में रोग होने पर शरीर अपनी तरफ से तो प्रयास करता है । परन्‍तु इस प्रक्रिया में पेट के मिसाज नाभी स्‍पंदन को यथास्‍थान लाने एंव वर्फ की तरह से ठंडे नीबूओ को नाभी पर लगातार रखने से शरीर के उस हिस्‍से में एक असमान्‍य घटना होती है एंव शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली इसके लिये सर्धष हेतु सजग हो कर प्रयास करने लगते है एंव शरीर समस्‍त आवश्‍यक पूर्तियॉ करने लगता है इसका सुखद परिणाम यह होता है कि उस रोगग्रस्‍त अंग को स्‍वस्‍थ्‍य होने के लिये समस्‍त आवश्‍यकताओं की पूर्तियॉ यथासमय हो जाती है एंव एक बार सुस्‍पतावस्‍था के अंग संचालित होते ही अपना यथेष्‍ट कार्य नियमित रूप  से करने लगते है एंव रोग से मुक्‍त हो जाते है । नीबूओं का नाभी के ऊपर रख कर उपचार करने की विधि चीन व जापान की प्रकृतिक उपचार विधि है इससे पेट र्दद की समस्‍त प्रकार की बीमारीयों का एंव बॉझपन का उपचार सदियों से होता आया है एंव इसके बडे ही आर्श्‍चजनक एंव सुखद परिणाम मिले है ।
                     नाभी से समस्‍त प्रकार के रोगो का उपचार
1- टली हुई नाभी से समस्‍त प्रकार के रोगों का उपचार :-
2-औठों के फटने पर नाभी पर सरसों या देशी घी को लगाने से ओंठ नही फटते एंव ओंठों का रंग गुलाबी हो जाता है ।
3-सर्दी झुकाम होने पर नाभी में विक्‍स लगाने से विक्‍स का प्रभाव पूरे शरीर में बना रहता है एंव इससे सर्दी एंव झुकाम जल्‍दी ठीक हो जाता है ।
4-नाभी पर बादाम का तेल नियमित रूप से लगाने से त्‍वचा का रंग साफ होता है एंव त्‍वचा स्‍निग्‍ध मुलायम हो जाती है ।
4-चहरे पर मुंहासे होने पर नीम के तेल में युकेलिप्‍टस का तेल मिला कर नियमित लगाने से मुंहासे तथा ब्‍लैक हेड ठीक हो जाते है । परन्‍तु इसमें कुछ समय लगता है इसलिये उपचार नियमित तथा लम्‍बे समय तक करना चाहिये ।
5-यदि शरीर से र्दुगन्‍ध आती हो तो गुलाब जल में थोडा से डियोट्रेन्‍ट मिला कर लगा दीजिये फिर कमाल देखिये कई घन्‍टों तक पूरे शरीर में गुलाब जल तथा डियोड्रेन्‍ट की खुशबू बनी रहेगी ।
6- यदि पेशाब न उतरती हो तो चूंहे की लेडी को पानी में धोल कर नाभी पर लगा दे पेशाब आसानी से हो जायेगी ।
7-गर्मीयों में लू से बचने के लिये प्‍याज के रस में थोडा सा नमक मिला कर उसे नाभी पर लगा दे इससे लू से बचत होती है एंव शरीर से निकलने वाले पानी की पूर्ति भी हो जाती है ।
8-त्‍वचा पर दॉग धब्‍बे हो या त्‍वचा साफ नही दिखती हो उन्‍हे नीबू के रस को शहद में मिला कर कुछ दिनों तक नाभी में लगाने से त्‍चचा के दॉग धब्‍बे ठीक हो जाते है एंव त्‍वचा साफ मुलायम हो जाती है ।
9-मच्‍छडों से बचने के लिये कपूर को पीपरमेन्‍ट में मिलाकर नाभी में लगाने से इसकी गंध से मच्‍छड आप के शरीर के पास नही आते एंव कॉटते नही । दक्षिण अफ्रिका के जंगलों में एक प्रकार के ऐस मच्‍छड पाये जाते है जिससे बचना संभव नही था साथ ही इस इलाके में एक किस्‍म का ऐसा वायरस भी पाया जाता था जो पेडो के पत्‍तों पर पनपता था एंव यह पशु पक्षियों या अन्‍य माध्‍यमों से मानव शरीर में प्रवेश कर जाता था तथा इस वायरस से मनुष्‍यों की मृत्‍यु हो जाती थी । इस लिये वहॉ की जनजाति समुदाय मच्‍छडों से बचने के लिये नाभी पर कपूर को पिपरमेन्‍ट में मिला कर उसे नीलगिरि के तेल में पेस्‍ट बना कर नाभी पर लगाता था इससे उसे एक तो मच्‍छड नही कॉटते थे दूसरा किसी भी प्रकार के वायरस का प्रवेश इसकी गंन्‍ध की वजह से भी नही होता था । इसी समुदाय के लोग चूंकि दक्षिण अफ्रिका में सर्फो का अत्‍याधिक प्रकोप है इस लिये सॉपो से बचने के लिये वे कपूर में पिपरमेन्‍ट नीलगिरी का तेल एंव सर्फगंधा की जड का पेस्‍ट बना कर नाभी पर लगाते थे इसकी गंध से सांप इन व्‍यक्तियों के आस पास नही आते थे एंव इस अरूचिकर गंध की वजह से वे इन मनुष्‍यों को नही कांटते थे ।
10-पेचिस होने पर मकानों के आस पास जो दुधी घॉस पैदा होती है उसे पीस का पिलाने एंव उसकी जड को नाभी पर लगाने से किसी भी प्रकार की पेचिस हो तुरन्‍त फायदा होता है ।
11-जिन महिलाओं को बच्‍चा पैदा होते समय अत्‍याधिक पीडा होती हो या जो महिलाये प्रश्‍व पीडा से बचना चाहती हो वे अददाझारे की जड को पीस कर नाभी पर लगा ले इसके नियमित कुछ दिनों तक नाभी पर लगाने से बच्‍चा आसानी से हो जाता है । प्राचीन काल में जब किसी महिला के यहॉ बच्‍च होने वाला होता था तो दॉई उसे इस अददाझारे की जड को पीस कर महिला की नाभी पर लगा देती थी इससे बच्‍चा आसानी से बिना गर्भावति को कष्‍ट दिये हो जाता था एंव महिलाओं को किसी भी प्रकार की परेशानी नही होती थी ।
12-शूल का र्दद :- जिन महिलाओं को शूल का पेट र्दद होता हो वह खाली पेट नाभी स्‍पंदन का परिक्षण करे यदि स्पिंदन ऊपर की तरफ है तो यह शूल का र्दद है यह अत्‍याधिक कष्‍टदायक होता है एंव आधुनिक चिकित्‍सा परिक्षणों व दवाओं से भी ठीक नही होता । यदि नाभी स्‍पंदन या नाभी नाडी की धडकन ऊपर की तरफ है तो आप सर्वप्रथम नाभी से एक अंगूल की दूरी पर अपने दॉये हाथ का अंगूठा रखिये एंव उसके ऊपर बॉये हाथ का अंगूठे को रखे नाभी को तेल से पूरी तरह से भर दीजिये ताकि आप अंगूठे से जब तेजी से दबाये तो नाभी पर भरा तेल आप के अंगूठे को भर दे अंगूठे का दवाब इतना होना चाहिये ताकि नाभी का पूरे तेल से अंगूठा पूरी तरह से डूब जाये , अब आप अंगूठे के दवाब को नाभी की तरफ तेजी से दबाते हुऐ जाये इस क्रम का बार बार आठ से दस बार करें , इसके बाद पुन: नाभी पर तीन अंगूलियॉ रखकर चैक करे यदि नाभी की धडकन नाभी के बीचों बीच आ गयी हो तो आप एक छोटा सा दिया जिसकी साईज नाभी से थोडी बडी हो उसे नाभी पर इस प्रकार रखे ताकि पहले जो धडकन थी वह दिये के खोखले भाग में आ जाये अब इसे दिये को आप किसी कपडे से या फीता जैसे कपडे या इलैस्टिक फीते से अच्‍छी तरह से इस प्रकार लगाये ताकि दिया नाभी पर अच्‍छी तरह से लगा रहे इसे लगा कर मरीज को घटे दो घंटे तक विश्राम करना चाहिये । इससे नाभी अपनी जगह आ जाती है परन्‍तु कभी कभी पुराने केशों में इस उपचार को सुबह खाली पेट दो तीन दिन के अन्‍तर से जब तक करना चाहिये जब तक नाभी स्‍पंदन या नाभी की धडकन नाभी के बीचों बीच नही आ जाती नाभी के धडकन के बीचों बीच आते ही शूल का र्दद फिर नही उठता यदि किसी को पतले दस्‍त होते हो तो वह भी ठीक हो जाता है ।  
13- पेट से सम्‍बन्धित बीमारीयॉ आज के बदलते लाईफ स्‍टाईल की वजह से सर्वप्रथम जो आम बीमारीयॉ या शिकायते हो रही है वह है पेट से सम्‍बन्धित बीमारीयॉ । जैसा कि चिकित्‍सा विज्ञान में कहॉ जाता है कि पेट स्‍वस्‍थ्‍य तो शरीर व मन स्‍वस्‍थ्‍य रहेगा यदि पेट बीमार हुआ तो शारीरिक व मानसिक व्‍याधियॉ धीरे धीरे मनुष्‍य को रोग की चपेट में लेना प्रारम्‍भ कर देते है ,इसका प्रारम्‍भ पाचनक्रिया दोषों से प्रारम्‍भ होता है जैसे पेट में हल्‍का र्दद ,भूंख का न लगना ,पेट भारी भारी ,कब्‍ज की शिकायत , शौच का पूरी तरह न होना , पेट से आवाज आना ,कभी कभी किसी को उल्‍टी की इक्‍च्‍छा होना ,पेट में गैस बनना जिसकी वजह से हिदय में पीडा या ह्रिदय रोग की संभावना ,कभी कभी किसी किसी को पतले दस्‍त हो जाना ,भोजन का न पचना , या कुछ खाद्य पदाथों के खाने से स्‍वास्‍थ्‍य खराब हो जाना , चिडचिडापन , आलस्‍य , नींद का दिन में अधिक आना परन्‍तु रात्री में नींद न आना , बुरे बुरे ख्‍याल आना खॉसकर यह शिकायत महिलाओं में अधिक पाई जाती है कुछ महिलाओं को पेट में गैस की शिकायत के बाद ह्रिदय में र्दद उठता है आधुनिक चिकित्‍सा परिक्षणों में कुछ नही निकलता ,इसके साथ उन्‍हे मानसिक तनाव ,पेट में भारीपन ,कब्‍ज , गैस का बनान,पेट से वायु का ह्रिदय की तरफ बढता हुआ महसूस होना यह प्राय: हिस्‍टीरिया के प्रकारणों में देखा जाता है इससे वह महिला इस प्रकार की हरकते करने लगती है जैसे उस पर किसी प्रेतात्‍मा या भूत प्रेत का साया हो वह एकटक निहारती है फिर बेहोश हो जाती है थोडी ही देर में उसे होश भी आ जाता है । यह सब बीमारी पेट से प्रारम्‍भ होती है । अर्थात पेट से सम्‍बन्धित कई छोटे छोटे लक्षण है जिन्‍हे हम प्राय: नजरअंदाज कर जाते है जो आगे चल कर किसी बडी बीमारी का कारण बनती है । चूंकि पेट से सम्‍बन्धित बीमारीयों का मुंख्‍य कारण पेट के रस रसायनों की असमानता है , इसकी वजह से नाभी स्‍पंदन अपने स्‍थान से खिसक जाता है (जैसा कि नाभी चिकित्‍सा में कहॉ गया है) । इस प्रकार की बीमारीयों का उपचार नाभी चिकित्‍सा एंव ची नी शॉग चिकित्‍सा में बडा ही आसान व प्राकृतिक है जिसमें किसी भी प्रकार के दवा दारू की आवश्‍यकता नही होती इसमें नाभी स्‍पंदन की पहचान कर उसे यथास्‍थान बैठाल दिया जाता है एंव शरीर के अंतरिक प्रमुख रोगअंगों की जाती है एंव उसे या उसके आस पास के ऐसे अंगों को पहचाना जाता है जो सुस्‍पतावस्‍था में आ गये हो या निष्‍क्रिय होने लगे हो उसे पहचान कर उसे सक्रिय कर देने से शरीर या पेट की क्रिया सामान्‍य रूप से कार्य करने लगती है एंव बीमारी हमेशा हमेशा के लिये दूर हो जाती है ।
उपचार:- मरीज को सीधे लिटा दीजिये उसकी नाभी पर तीन अंगूलियों को रख कर धीरे धीरे दबाव देते हुऐ महशूस करे की नाभी की धडकन किस तरफ है । कभी कभी यह धडकन नाभी के बहुत नीचे पाई जाती है और ऐसी स्थिति में नाभी पर अंगूलियों का दबाव बहुत गहरा देना पडता है नाभी जिस तरफ धडक रही हो उसके ऊपर सीने की तरफ जहॉ पर छाती का पिंजडा प्रारम्‍भ होता है उसके पास जो अंग पाये जा रहे हो उसे टारगेट किजिये ताकि उसी अंग पर आप को दबाव अधिक व बार बार देकर उसे सक्रिय करना है । यदि नाभी पेडरू की तरफ धडकती हो तो आप नीचे के अंगों को टारगेट करे । सर्वप्रथम आयल को नाभी पर डाल कर पूरे पेट का मिसाज इस प्रकार करे ताकि पूरा पेट सक्रिय हो जाये अब जिस अंग की तरफ नाभी की धडकन है उसके आखरी छोर तक नाभी से दबाव देते हुऐ जाये फिर पुन: आखरी छोर से नाभी तक आये इस क्रम को कई बार कर । पेट के मिसाज करते समय मरीज से यह अवश्‍य पूछ ले कि उसे अपेन्डिस या हार्निया तो नही है यदि है तो पेट की मिसाज सम्‍हल कर करे एंव दबाव अधिक न दे यदि नही है तो पूरे पेट की मिसाज दबाब देते हुऐ करते जाये इससे पेट के अंतरिक अंगों की मिसाज होने से समस्‍त अंग सक्रिय हो जाते है रस रसायनो की असमानता ठीक हो जाती है मिसाज खाली पेट ही करना चाहिये । आप ने अभी तक दो कार्य किये एक नाभी स्‍पंदन को पहचाना फिर उस अंग को टारगेट कर उसे मिसाज से सक्रिय किया अब आप को सबसे महत्‍वपूर्ण कार्य करना है वह है नाभी स्‍पंदन को यथास्‍थान लाना इसके लिये आप नाभी पर पुन: अपनी अंगूलियों से परिक्षण कर इसके बाद जिस तरफ नाभी खिसकी है उसे अंगूलियों में तेल लगाकर उसे नाभी की तरफ दबाव देते हुऐ लाये जब वह ठीक नाभी के बीचों बीच आ जाये तो उसके ऊपर एक दिया को उल्‍टा कर किसी कपडे से या इलैस्टिक रिबिन से बांध दीजिये ताकि वह नाभी पर अच्‍छी तरह दबाब देते हुऐ बंधी रहे अब रोगी को सीधा एक दो घंटे तक लेटे रहेने दीजिये । इससे उसके पेट से सम्‍बधित समस्‍त प्रकार की बीमारीयों का उपचार आसानी से हो जाता है । परन्‍तु यहॉ पर एक बात का और ध्‍यान रखना है वह यह है कि कुछ लोगों की नाभी उपचार से कुछ दिनों के लिये ठीक हो जाती है परन्‍तु कुछ दिनों बाद पुन: टल जाती है इसलिये यह उपचार सप्‍ताह में एक बार या जरूरत के अनुसार एक दो दिन छोड कर करना पडता है ,इसलिये इस उपचार को घर वालो को सीख लेना चाहिये ताकि जरूरत पडे पर वह यह उपचार कर सके ।

Friday, 21 September 2018

बिना किसी महगे इलाज के नाभी उपचार & वीडियो


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Monday, 14 August 2017

ब्‍युटी पार्लर को ब्‍युटी क्‍लीनिक में क्‍यों बदले ?

              ब्‍युटी पार्लर को ब्‍युटी क्‍लीनिक में क्‍यों बदले ?
       
 ब्‍युटी पार्लर को ब्‍युटी क्‍लीनिक में क्‍यों बदले ? चूंकि आज के व्‍यवसायीक प्रतिस्‍पृद्धा की वजह से स्‍थानीय ब्‍युटी पार्लर घाटे का सौदा बन कर रह गयी है । इसका प्रमुख कारण है स्‍थानीय ब्‍युटी पार्लर से प्रशिक्षण लेकर ही महिलाये अपना ब्‍युटी पार्लर खोलती है उनके पास अत्‍याधुनिक ब्‍युटी पार्लस की तकनीकी का ज्ञान नही होता न ही वे अपने ग्राहकों को अत्‍याधुनिक ब्‍युटी पार्लस की सुविधाये उपलब्‍ध नही करा पाती । चिकित्‍सा से सम्‍बन्धित कई समस्‍याओं का निदान भी उनके पास नही होता । स्‍थानीय ब्‍युटी पार्लस में केवल फेसियल ,श्रृगार, आईब्रों , बालों का काटना ,बेक्‍स जैसा कार्य किया जाता है जो उनके आस पास खुले सभी ब्‍युटी पार्लस में उपलब्‍ध होता है इससे काम्‍प्‍टीशन बढता है एंव आमदनी भी कम होती है । ब्‍युटी क्‍लीनिक में ग्राहकों की कई सुविधायें उपलब्‍ध होती है । जैसे टैटू आर्ट , बी गम से बालों को बिना किसी र्दद के निकालना , पिर्यसिंग जिसमें नाक कान की तरह से शारीर के आकृषक अंगों को बिना र्दद के छेदना , मस्‍से मुंहासे एंव ब्‍लैक हैड का उपचार ,शरीर के कई आकृषक अंगों को उम्र के हिसाब से कपिंग विधि से उभारना , स्‍ट्रेचमाकै का उपचार , त्‍वचा को गोरी स्निगंध बनाना , नीशेप क्‍लीनिक में पेट को स्‍लीम आकृषक बनाने के साथ नाभी को गहरा  आकृषक बनाना, मेगनेट थैरापि , प्राकृतिक चिकित्‍सा , के साथ नाभी स्‍पंदन से सौन्‍र्द्धय समस्‍याओं का निदान , ची नी शॉग उपचार से सौर्न्‍दृय समस्‍याओं का उपचार आदि ।
ब्‍युटी क्‍लीनिक की कई ब्रॉच है ब्‍युटी पार्लर संचालक इसे अपनी सुविधानुसार घर बैठे इसे आसानी से किस्‍तों में एक एक ब्रॉच की जानकारीयॉ  सीख सकती है , इसकी समस्‍त जानकारीयॉ मेल से किस्‍तों में भेजी जाती है । आप अपनी सुविधानुसार एक एक बॉच में प्रवेश लेते जाये एंव जो भी मेंल आप को मिलते जाये उसका अध्‍ययन करते जाये । एक ब्रॉच का अध्‍ययन करने के बाद दूसरे ब्रॉच में प्रवेश ले एंव उसका अध्‍ययन करते जाते इस प्रकार थेवरी का नालेज आप को होता जायेगा प्रेक्टिकल ज्ञान हेतु इस प्रकार की व्‍यवस्‍था है जिसमें आप को आप के नगर में 20 छात्र होने पर यह प्रेक्टिकल बिलकुल नि:शुल्‍क उपलब्‍ध कराया जायेगा । यदि 20 से कम छात्र होगे तो आप को आप के आस पास के जिस नगर में यह नि:शुल्‍क प्रशिक्षण चलेगा उसमें आप को शामिल होना पडेगा । यहॉ पर एक बात का आप को ख्‍याल रखना आवश्‍य है प्रत्‍येक भेजे गये पाठय सामग्रीयों का एक्‍जाम मेल पर होगा एंव उत्‍तर आप को मेल से ही देना है उसमें पास होने पर ही आप को आगे का कोर्स भेजा जायेगा साथ ही आप को जो मेल भेजा जाता है उसकी सूचना तत्‍काल देना होगी तभी आगे का कोर्स भेजा जायेगा । चूंकि कई छात्र इस कोर्स में प्रवेश तो ले लेते है परन्‍तु उनका इस विषय में रूचि नही होती इस लिये यह व्‍यवस्‍था की गई है कि मेल के प्राप्‍त होने की सूचना प्रत्‍येक छात्र को देना होगी साथ ही भेजे गये विषयों में पास होना होगा । स्‍थानीय ब्‍लागर साईड पर कुछ लोगों द्वारा हमारे पाठयक्रम कों प्रकाशित किया है परन्‍तु आप को सूचित किया जाता है यह मात्र आप की सुविधा हेतु है इस पर आप निर्भर न रहे एंव मेल से ही अपने कोर्स को प्राप्‍त करते जाये । ब्‍लागर साईड की हम निन्‍दा नही करते इसकी हम भूरी भूरी प्रसंन्‍शा करते है । आप भी अपना ब्‍लाग बनाईये तथा दुसरों के ब्‍लाग पर जाते है तो उस पर कमेन्‍ट कीजिये, लाईक कीजिये,एंव उनके फ्रेन्‍ड बनिये यह अच्‍छी बात है इससे इस कोर्स के ज्ञान का आदान प्रदान होगा । आप अपनी समस्‍याओं को एक दुसरे से शेयर भी कर सकते है । हमारा दॉवा है यदि आप ब्‍युटी क्‍लीनिक को कोर्स कर लेते है तो अपने शहर में आप ही एक मात्र इस विषय के जानकार होगे । इसका फायदा आप को मिलेगा चूंकि आप अपने ग्राहको को ऐसी सुविधाये उपलब्‍ध करायेगे, जो आप के नगर के स्‍थानीय ब्‍युटी पार्लस उपलब्‍ध नही करा सकते इससे आप का प्रचार प्रसार बिना किसी विज्ञापन एंव खर्च के अपने आप होने लगेगा अर्थात आप का नेटवर्क अपने आप बनने लगेगा । इससे ग्राहकों की संख्‍या बढेगी एंव आप की आमदनी भी बढने लगेंगी । ब्‍यूटी क्‍लीनिक में किये जाने वाले कार्यो का पारिश्रमिक या शुल्‍क भी मुंह मॉगा मिलता है । साथ ही ब्‍युटी क्‍लीनिक की सेवाये अधिकतर साधन सम्‍पन्‍न परिवारो द्वारा कराई जाती है
    ब्‍युटी पार्लर संचालकों से हमारा निवेदन है, कि आप ब्‍युटी क्‍लीनिक के एक ब्रॉच को ही अपने ब्‍यूटी पार्लर शामिल कर इसकी उपलब्‍धीयों का परिक्षण कर ले । हमारा आप से बायदा है इसके बाद आप हमारे अन्‍य ब्रॉच को अपने यहॉ शामिल करेगे आप करेगे ।

   यह कोर्स बिलकुल नि:शुल्‍क है इसी लिये यह व्‍यवस्‍था की गयी है कि इसमें न तो हमारा पैसा खर्च हो न आप का । इस नि:शुल्‍क कोर्स को यदि आप घर बैठे करना चाहते हो तो इस ई मेल पर सम्‍पर्क करे battely2@gmail.com

तम्‍बाखू के नियमित सेवन से कैंसर

            तम्‍बाखू के नियमित सेवन से कैंसर
तम्‍बाखू के नियमित सेवन से कैंसर होने की संभावना बढती जा रही है । हमारे देश में इसकी संख्‍या चौकाने वाली है । बच्‍चों से लेकर बडे बुर्जूर्गो में तम्‍बाखू खाने के प्रकरण हमारे देश में अधिक मिलेगे । तम्‍बाखू के नियमित सेवन से मुंह में छाले होने लगते है धीरे धीरे यह फाईब्रोसेस कैंसर की अवस्‍था में तबदील होने लगते है जब तक इसका पता चलता है बहुत देर हो चुंकी होती है । अत: समय रहते तम्‍बाखू का सेवन बन्‍द कर देना चाहिये । परन्‍तु यह इतना आसान नही है एक बार तम्‍बाखू सेवन की लत लग जाये तो इससे बचना प्राय असंभव है । परन्‍तु दृड इक्‍च्‍दा शक्ति एंव कुछ नये प्रयासों से इससे बचा जा सकता है ।
बचाव :- यदि तम्‍बाखू खाने की प्रबल इक्‍च्‍छा हो एंव मुंह में छाले हो रहे हो तो आप निम्‍न प्राकृतिक साधन का प्रयोग कर कैसर एंव तम्‍बाखू खाने की प्रबल इक्‍च्‍छा से बच सकते है । अदरक एंव नीबू में कैंसर ग्रोथ एंव कैंसर सेल्‍स को खत्‍म करने का अदभुत गुण होता है । इसके नियमित कुछ दिनों तक सेवन करने से कैंसर से बचा जा सकता है ।
तम्‍बाखू खाने की प्रबल इक्‍च्‍छा:- ऐसे व्‍यक्ति जिन्‍हे तम्‍बाखू खाने की प्रबल इक्‍च्‍छा हो उन्‍हे अदरक के गुटका का प्रयोग करना चाहिये । इसे आप अपने घर पर बना सकते है इसके लिये आप अदरक को छोटे से छोटे टुकडे में कॉट लीजिये इसके बाद इसमें नीबू का रस इतना मिलाये जिससे यह पूरी तरह से उसमें डूब जाये इसमें इतना सेधा नमक मिलाये तथा इसे छाये में सूखने के लिये रख दीजिये परन्‍तु ध्‍यान इस बात का रखे कि इसे ढके नही अन्‍यथा अदरख खराब हो जायेगा उसमें फॅफूदी पड सकती है इसलिये इसे बिना ढॅके छॉये में सूखने दे गर्मीयों के दिनों में यह तीन चार दिन बाद यह पूरी तरह से सूख जायेगा । इसके बाद जब आप को पूरी तरह से विश्‍वास हो जाये कि यह पूरी तरह से सूख गया है अब इसे आप कि खाली बन्‍द डिब्‍बे में रख लीज‍िये । आप का अदरक व नीबू का खुटका तैयार है ।
जब भी आप को तम्‍बाखू खाने की इक्‍च्‍छा हो इसकी इतनी मात्रा जितनी आप तम्‍बाखू की लेते है मुंह में डाल कर धीरे धीरे चूंसते जाये व अन्‍त में इसे चबा ले । इसका स्‍वाद बहुत अच्‍छा लगेगा । इसे रात्री में सोते समय भी मुंह में रख कर चूसते रहे एंव सुबह इसे अच्‍छी तरह से चबा कर खॉ लीजिये ।
 इसके नियमित सेवन से मुंह के छाले एंव कैंसर से मुक्‍ती मिल जायेगी । यह अजमाया हुआ नुस्‍खा है । इससे काफी लोगों को लाभ हुआ है । फिर इसमें खर्च ही कितना है फिर इसे एक बार अजमाने में नुकसान क्‍या है । पहले आप उपयोग करले यदि लाभ नजर आये तो अपने अन्‍य मित्रों को इसके सेवन की सलाह दीजिये ।
      इस प्रकार की जनकल्‍याणकारी जानकारी को अपने अधिक से अधिक मित्रों को सोशल साईड पर सेन्‍ड करे ताकि कैंसर व मुंह में छॉले  से ग्रस्ति व्‍यक्ति इससे लाभ उठा सके ।   
                    जन जागरण नशामुक्ति केन्‍द्र

       जन जागरण एजुकेशनल एण्‍ड हेल्‍थ वेलफेयर सोसायटी सागर म0प्र0

Sunday, 6 August 2017

मोटापा/सेल्‍युलाईट

             
    मोटापा/सेल्‍युलाईट

             सेल्‍युलाइट वसा कोशिकाओं की परते होती है , ये त्‍वचा के नीचे पाये जाने वाले उन ऊतकों में पायी जाती है ,जो अन्‍य ऊतकों व अंगों को सहारा देती है और जोडती है । यह वसा अधिकतर महिलाओं के जांधो व नितम्‍बों पर जमा होती है । इसमें त्‍वचा एकदम संतरे के छिलके की तरह खुरदरी दिखाई देती है ।अतरिक्‍त चर्बी और सेल्‍युलाई का सीधा सम्‍बन्‍ध होता है,इसमें बढी हुई वसा कोशिकायें संयोजक ऊतकों पर दबाब बनाती है ,इससे त्‍वचा कोमल दिखायी नही देती है । संयोजक ऊतक  (कलेक्टिव) के बीच की परत को मुलायम व लचीला बनाये रखने के लिये बायों फलेबनाईडस और विटामिन सी  लाभदायक होते है । विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में मौजूद टाक्‍सीन के कारण ऐसा होता है ,लेकिन यह भी देखा गया है कि महिलाओं के कनेक्‍टव टिश्‍यू पुरूषों के मुकाबले काफी दृढ होते है । इसलिये जैसे जैसे महिलाओं का बजन बढता जाता है । कोशिकायें फैलती जाती है ऐसी स्थिति में ये ऊतक की ओर यानी त्‍वचा की ऊपरी परत की तरफ फैलती जाती है ,जिससे त्‍वचा एकदम संतरे के छिलके जैसी दिखलाई देती है । पुरूषों में अकसर बसा का जमाव जांधों पर कम ही देखने को मिलता है । क्‍योकि उनकी बाहरी त्‍वचा काफी मोटी होती है । जिससे स्‍पष्‍ट तौर पर त्‍वचा के नीचे कितना वसा जमा हो रहा है ,इसका पता नही चलता ,लेकिन सेल्‍यूलाईट के पीछे मूल कारण अभी भी विशेषज्ञों के लिये कौतुक का विषय बना हुआ है ।   
    


अक्‍सर रक्‍त संचार  इस्‍ट्रजन  बढ जाने के कारण संयोजन ऊतक कमजोर हो जाते है और बॉटर रिटेशन की समस्‍या बढ जाती है । जिस के कारण चर्बी शरीर में जमा होने लगती है ,लसीका प्रवाह ठीक रहे,इसके लिये नियमित व्‍यायाम करना आवश्‍यक है । यदि ऐसा न किया जाये तो निष्‍कासन ठीक से नही हो पाता है ,और जरूरत से ज्‍यादा पानी के कारण त्‍वचा फूल जाती है जिससे रक्‍त ऊतकों तक नही पहुच पाता है । और फ्री रेडिकल्‍स निष्‍कासित नही हो पाते है । अन्‍य बसा या बसा कोशिकाओं की तरह सेल्‍युलाईट फैट भी कम कैलोरी वाला भोजन करने से प्रभावित होता है और इससे शरीर के वसा में कमी आती है लेकिन वसा धटान के बाबजूद फैट सेल्‍स मोजूद रहते है ,और कैलोरी लेने पर तुरन्‍त बढ जाते है । इसलिये सेल्‍यूलाईट को सर्जरी द्वारा खत्‍म करने की सलाह डाक्‍टर दिया करते है ।वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना है कि ,बिना सर्जरी के सैल्‍युलाईट का उपचार संभव नही है ।परन्‍तु अन्‍य वैकल्‍पिक उपचारको का मानना है कि ऐसे ऊतकों व टाक्‍सीन को शरीर की मेटाबोलिक दर व ऊर्जा की खपत को बढाकर कम किया जा सकता है । फैट सेल्‍स जो शरीर में मौजूद है ,उनकी जानकारी को यदि भुला दिया जाये व सेल्‍स के बीच बचे फ्रीरेडिकल्‍स टाक्‍सीन तथा अव्‍यर्थ पदार्थो को यदि शरीर से निकाल दिया जाये तो इस प्रकार की समस्‍या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसीलिये चिकित्‍सक योगा व कसरत आदि करने की सलाह देते है ,शरीर व कोशिकाओं के मेटाबोलिक दर व ऊर्जा खपत को बढाकर शरीर से अव्‍यर्थ पदार्थो को निकाला जा सकता है ।
     एन्‍टी आक्‍सीडेंटस हमारे शरीर का फ्रिरेडिकल्‍स से बचाव करता है । एन्‍टी आक्‍सीडेंटस विटामिंस एंजाईम्‍स व हर्बल एक्‍सटैक्‍ट्रस होते है । इसमें विटामिन सी ,विटामिन ई और बीटा कैरोटीन प्रमुख है । ये ताजे फलों सब्‍जीयों जडी बूटीयों आदि में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है । शरीर का रक्‍त संचार ठीक से हो इसके लिये आवश्‍यक है कि रक्‍त संचार को ठीक करने के प्राकृतिक उपाय एव बॉडी की मिसाज, या बॉडी ब्रश भी इसके लिय उपयोगी है । हल्‍के हल्‍के मुलायम ब्रश से बॉडी की मिसाज करने से या असेंशियल आलय से त्‍वचा को माईश्‍चराईज करने से रक्‍त संचार उचित तरिके से होता है । ब्‍युटी क्‍लीनिक में बी गम मिसाज से भी रक्‍त संचार को उचित तरीके से कम किया जा सकता है । चीन की परम्‍परागत एक उपचार विधि है जिसे ची नी शॉग कहते है । मोटापा कम करने में आज कल इसका उपयोग समृद्धसील राष्‍ट्रों में काफी उत्‍साह के साथ किया जा रहा है चूंकि इसके परिणाम काफी आशानुरूप रहे है । इस उपचार विधि का एक और लाभ यह है कि इसमें मोटापे को घटाने के लिये पेट का मिसाज किया जाता है । इससे पेट के अंतरिक महत्‍पूर्ण अंग जिनका उत्‍तदायीत्‍व  हमारे शरीर के पाचन तंत्र को उचित तरीके से कार्य लेना है । ची नी शॉग उपचार से पेट के अंतरिक अंग मजबूत होते है एंव मेटाबोलिक की दर को बढाकर अनावश्‍क चर्बी को आशानुरूप कम किया जाता है । चीनी शॉग उपचार से हमारे शरीर की प्रिरेडिकल्‍स एंव टाक्‍सीन आसानी से निकल जाती है इससे त्‍वचा पर झुरूरीया नही पडती साथ ही त्‍वचा स्निग्‍ध मुलाय हो जाती है । ची नी शॉग उपचार से हमारे शरीर की सर्विसिंग हो जाती है ।  प्राकृतिक उपायों में रसेदार भोजन व ताजे फल तथा अधिक पानी पीने एंव व्‍यायाम ,योगा आदि कर शरीर की ऊर्जा व मेटाबोलिक दर को बढायें ताकि शरीर से अव्‍यर्थ पदार्थ बाहर निकल जायें । मॉस पेशियों के अधिक इस्‍तेमाल से रक्‍त व लसिका सर्कुलेशन ठीक रहता है इससे पसीना अधिक आता है त्‍वचा डीटाक्सिफाई होती है एंव चर्बी कम हो जाती है ।    
    अरोमाथैरेपी :- मोटापा घटाने या कम करने में अरोमाथैरेपी के आयल भी उपयोगी है । मिसाज के लिये रोजमेरी फेनल ,असेशियल आयल में दो तीन बूद थोडा सा बादाम का तेल मिलाकर इसे मेन नर्व जो शरीर व अंगों के मध्‍य लाईन पर मौजूद होते है इसे इस्‍टूमुलेट (उत्‍तेजित) करने से शरीर व कोशिकाओं के मेटाबोलिक दर व ऊर्जा की खपत बढती है  एंव शरीर से अत्‍याधिक पसीना निकलता है । इससे शरीर का टॉक्सिन पानी पसीने के माध्‍यम से बाहर आने लगता है जो कि शरीर का मोटापा कर करता है । पेट पर मोटापा कम करने एंव चबी घटाने के प्रमुख छै: पाईन्‍ट है । जिसका विवरण एक्‍युपंचर चिकित्‍सा में किया गया है । मोटापा कम करने व चर्बी को घटाने एंव मेटाबोलिक दर को बढाने के ये छै: प्रमुख बिन्‍दू है जिसका प्रयोग एक्‍युपंचर ,नेवल एक्‍युपंचर के साथ ची नी शॉग उपचार तथा एक्‍युप्रेशन चिकित्‍सा पद्धतियों के साथ मिसाज थैरापी में किया जाता है । उक्‍त पाईन्‍ट सम्‍पूर्ण शरीर के मोटर नर्व को कवर करते है ,इसीलिये यंत्र निर्माताओं ने मोटापा कम करने व नर्व को इस्‍टुमूलेट करने हेतु कुछ इस प्रकार के यंत्र करने हेतु कुछ इस प्रकार के यंत्रों का निर्माण किया है जिसमें उक्‍त पाईन्‍ट को दबाब देने व स्‍टुमूलेट करने की व्‍यवस्‍था रहती जैसे बटर फलाई एड ,स्‍लीम सोना बेल्‍ट आदि ,बटर फलाई तितली के आकार का छोटा सा यंत्र होता है इसमें पेट पर चिपका देते है इसके स्‍वीच को चालू करने से मशीन में बायबरेशन होता है यह बायबरेशन प्रमुख नर्व केन्‍द्र को उत्‍तेजित करते है इससे शरीर में ऊर्जा की खपत बढती है व शरीर के टाक्‍सीन पसीने के द्वारा बाहर निकलने लगते है । शरीर के इस प्रमुख बिन्‍दूओं को इस्‍टीमुलेट करने के कई तरीके प्रचलन में है । 
एन्‍टी आक्‍सीडेंटस :- एन्‍टी आक्‍सीडेंटस हमारे शरीर को फ्री रेडिकल्‍स से बचाव करता है ,फ्री रेडिकल्‍स एक ऐसा तत्‍व है ,जो शरीर के कोशिकाओं के आक्‍सीकरण क्रिया के बाद बेकार (अव्‍यर्थ पदार्थ) बचा रहता है । शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इसे शरीर से बाहर निकालने का प्रयास करती रहती है ,परन्‍तु इसके बाद भी फ्रीरेडिकल्‍स शरीर में बच रहते है ,इनके जमने से शरीर की अन्‍य कोशिकाओं के कार्यो में अनावश्‍यक अवरोध उत्‍पन्‍न होता है ,मृत सेल्‍स शरीर से बाहर नही निकल पाते ,नये सेल्‍स का निमार्ण अवरूद्ध हो जाता है इससे अन्‍य व्‍यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर नही निकल पाते । वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी फ्रीरेडिकल्‍स की वजह से वृद्धावस्‍था होती है । त्‍वचा व मॉसमेशियों में झुरूरीयॉ उत्‍पन्‍न होने लगती है । एण्‍टी आक्‍सीडेंटस को रोका जा सकता है ,सैल्‍युलाईट ट्रीटमेन्‍ट से मॉसपेशियों में जमने बाले ब्‍यर्थ पदार्थो व फ्रीरेडिकल्‍स को बाहर निकालने की कई प्राकृतिक विधियॉ प्रचलन में है । सौंर्द्धय उपचार में इनका प्रयोग सदियों से होता आया है कुछ लोगों में यह गलत धारण है कि सैल्‍युलाईट उपचार से केवल मोटापा कम किया जाता है । परन्‍तु ऐसा नही है कि इसका उपचार से त्‍वचा का ढीलापन उसकी झुरूरीयॉ तथा त्‍वचा की स्‍वाभाविकता को लम्‍बे समय तक कायम रखा जा सकता है ।                                                 

पेट का अनावश्‍यक मोटापा

                     पेट का अनावश्‍यक मोटापा
     
जापान ,चीन एंव अन्‍य पश्चिमी देशों में प्राकृतिक चिकित्‍सकों द्वारा पेट के अनावश्‍यक मोटापे को कम करने के लिये कई विधियॉ अपनाई जाती है । उनमें से प्रमुख है पेट पर आडी रेखा में नाभी के बीचों बीच से होते हुऐ एक नाडे या इलैस्टिक को बॉधना प्रमुख है । यह विधि चीन , जापान व अन्‍य पश्चिमी राष्‍ट्रों में काफी प्रचलित है । कई मिसाज उपचारकर्ताओं द्वारा पेट के मिसाज विधि से भी पेट के मोटापे को कम किया जाता है । सेल्‍युलाइट वसा कोशिकाओं की परते होती है , ये त्‍वचा के नीचे पाये जाने वाले उन ऊतकों में पायी जाती है ,जो अन्‍य ऊतकों व अंगों को सहारा देती है और जोडती है । यह वसा अधिकतर महिलाओं के जांधो व नितम्‍बों पर जमा होती है । ऐसे पुरूष तथा महिलाये जो सामान्‍यत: अरामतलब जिन्‍दगी बसर करती है उनके पेट पर अनावश्‍यक चर्बी के जमने के कारण पेट पर अनावश्‍यक मोटापा देखा जाता है । पेट के मोटापा को बिना किसी दबा दारू के कम करने की यह विधि काफी कारगर साबित हुई है । इस उपचार विधि का प्रयोग प्राकृतिक उपचारकर्ताओं द्वारा बडे ही विश्‍वास के साथ किया जा रहा है जिसके बडे ही आशानुरूप परिणाम भी मिले है । जन सामान्‍य स्‍वंय इस उपचार विधि का प्रयोग कर उचित परिणाम प्राप्‍त कर सकते है ।

विधि:- पेट के अनावश्‍य मोटापे को कम करने के लिये आप को एक नाडा या आज कल बाजारों में रबड या इलैस्टिक मिलती है उसे नाभी से पेट पर आडी रेखा में बॉधना है । इसके नाभी से पेट पर आडी रेखा में बॉधने का मूल उदेश्‍य यह है कि इसे इतना दबाब देते हुऐ बॉधे ताकि पेट पर किसी प्रकार की परेशानी न हो पेट पर पाये जाने वाले एस टी-25 बिन्‍दू इस दबाब की वजह से सक्रिय हो जाते है । एक्‍युपंचर चिकित्‍सक इस एसटी-25 पाईट पर एक्‍युपंचर की बारीक सूईयॉ चुभा कर उपचार करते है एक्‍युप्रेशर चिकित्‍सक इस पाईन्‍ट पर गहरा दबाब देकर पेट के अनावश्‍यक मोटापा को कम करते है । पेट व नाभी से आडी रेखा में नाडे के दबाब से पेट की अनावश्‍यक चर्बी धीरे धीरे कम होने लगती है इस नाडे को पेट पर लम्‍बे समय तक बॉधे रहना है इसे तीन माह से छै: माह तक बॉधने से उचित परिणाम मिलने लगते है । पेट की चर्बी कम हो जाती है एंव पेट स्‍लीम सुन्‍दर शरीर के अनुपात में आ जाता है आप भी इस सरल प्राकृतिक विधि को अपना कर अपने पेट के अनावश्‍यक मोटापे से निजात पा सकते है ।