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Sunday, 6 August 2017

मोटापा/सेल्‍युलाईट

             
    मोटापा/सेल्‍युलाईट

             सेल्‍युलाइट वसा कोशिकाओं की परते होती है , ये त्‍वचा के नीचे पाये जाने वाले उन ऊतकों में पायी जाती है ,जो अन्‍य ऊतकों व अंगों को सहारा देती है और जोडती है । यह वसा अधिकतर महिलाओं के जांधो व नितम्‍बों पर जमा होती है । इसमें त्‍वचा एकदम संतरे के छिलके की तरह खुरदरी दिखाई देती है ।अतरिक्‍त चर्बी और सेल्‍युलाई का सीधा सम्‍बन्‍ध होता है,इसमें बढी हुई वसा कोशिकायें संयोजक ऊतकों पर दबाब बनाती है ,इससे त्‍वचा कोमल दिखायी नही देती है । संयोजक ऊतक  (कलेक्टिव) के बीच की परत को मुलायम व लचीला बनाये रखने के लिये बायों फलेबनाईडस और विटामिन सी  लाभदायक होते है । विशेषज्ञों का मानना है कि शरीर में मौजूद टाक्‍सीन के कारण ऐसा होता है ,लेकिन यह भी देखा गया है कि महिलाओं के कनेक्‍टव टिश्‍यू पुरूषों के मुकाबले काफी दृढ होते है । इसलिये जैसे जैसे महिलाओं का बजन बढता जाता है । कोशिकायें फैलती जाती है ऐसी स्थिति में ये ऊतक की ओर यानी त्‍वचा की ऊपरी परत की तरफ फैलती जाती है ,जिससे त्‍वचा एकदम संतरे के छिलके जैसी दिखलाई देती है । पुरूषों में अकसर बसा का जमाव जांधों पर कम ही देखने को मिलता है । क्‍योकि उनकी बाहरी त्‍वचा काफी मोटी होती है । जिससे स्‍पष्‍ट तौर पर त्‍वचा के नीचे कितना वसा जमा हो रहा है ,इसका पता नही चलता ,लेकिन सेल्‍यूलाईट के पीछे मूल कारण अभी भी विशेषज्ञों के लिये कौतुक का विषय बना हुआ है ।   
    


अक्‍सर रक्‍त संचार  इस्‍ट्रजन  बढ जाने के कारण संयोजन ऊतक कमजोर हो जाते है और बॉटर रिटेशन की समस्‍या बढ जाती है । जिस के कारण चर्बी शरीर में जमा होने लगती है ,लसीका प्रवाह ठीक रहे,इसके लिये नियमित व्‍यायाम करना आवश्‍यक है । यदि ऐसा न किया जाये तो निष्‍कासन ठीक से नही हो पाता है ,और जरूरत से ज्‍यादा पानी के कारण त्‍वचा फूल जाती है जिससे रक्‍त ऊतकों तक नही पहुच पाता है । और फ्री रेडिकल्‍स निष्‍कासित नही हो पाते है । अन्‍य बसा या बसा कोशिकाओं की तरह सेल्‍युलाईट फैट भी कम कैलोरी वाला भोजन करने से प्रभावित होता है और इससे शरीर के वसा में कमी आती है लेकिन वसा धटान के बाबजूद फैट सेल्‍स मोजूद रहते है ,और कैलोरी लेने पर तुरन्‍त बढ जाते है । इसलिये सेल्‍यूलाईट को सर्जरी द्वारा खत्‍म करने की सलाह डाक्‍टर दिया करते है ।वैज्ञानिकों का ऐसा भी मानना है कि ,बिना सर्जरी के सैल्‍युलाईट का उपचार संभव नही है ।परन्‍तु अन्‍य वैकल्‍पिक उपचारको का मानना है कि ऐसे ऊतकों व टाक्‍सीन को शरीर की मेटाबोलिक दर व ऊर्जा की खपत को बढाकर कम किया जा सकता है । फैट सेल्‍स जो शरीर में मौजूद है ,उनकी जानकारी को यदि भुला दिया जाये व सेल्‍स के बीच बचे फ्रीरेडिकल्‍स टाक्‍सीन तथा अव्‍यर्थ पदार्थो को यदि शरीर से निकाल दिया जाये तो इस प्रकार की समस्‍या से छुटकारा पाया जा सकता है। इसीलिये चिकित्‍सक योगा व कसरत आदि करने की सलाह देते है ,शरीर व कोशिकाओं के मेटाबोलिक दर व ऊर्जा खपत को बढाकर शरीर से अव्‍यर्थ पदार्थो को निकाला जा सकता है ।
     एन्‍टी आक्‍सीडेंटस हमारे शरीर का फ्रिरेडिकल्‍स से बचाव करता है । एन्‍टी आक्‍सीडेंटस विटामिंस एंजाईम्‍स व हर्बल एक्‍सटैक्‍ट्रस होते है । इसमें विटामिन सी ,विटामिन ई और बीटा कैरोटीन प्रमुख है । ये ताजे फलों सब्‍जीयों जडी बूटीयों आदि में प्रचुर मात्रा में पाई जाती है । शरीर का रक्‍त संचार ठीक से हो इसके लिये आवश्‍यक है कि रक्‍त संचार को ठीक करने के प्राकृतिक उपाय एव बॉडी की मिसाज, या बॉडी ब्रश भी इसके लिय उपयोगी है । हल्‍के हल्‍के मुलायम ब्रश से बॉडी की मिसाज करने से या असेंशियल आलय से त्‍वचा को माईश्‍चराईज करने से रक्‍त संचार उचित तरिके से होता है । ब्‍युटी क्‍लीनिक में बी गम मिसाज से भी रक्‍त संचार को उचित तरीके से कम किया जा सकता है । चीन की परम्‍परागत एक उपचार विधि है जिसे ची नी शॉग कहते है । मोटापा कम करने में आज कल इसका उपयोग समृद्धसील राष्‍ट्रों में काफी उत्‍साह के साथ किया जा रहा है चूंकि इसके परिणाम काफी आशानुरूप रहे है । इस उपचार विधि का एक और लाभ यह है कि इसमें मोटापे को घटाने के लिये पेट का मिसाज किया जाता है । इससे पेट के अंतरिक महत्‍पूर्ण अंग जिनका उत्‍तदायीत्‍व  हमारे शरीर के पाचन तंत्र को उचित तरीके से कार्य लेना है । ची नी शॉग उपचार से पेट के अंतरिक अंग मजबूत होते है एंव मेटाबोलिक की दर को बढाकर अनावश्‍क चर्बी को आशानुरूप कम किया जाता है । चीनी शॉग उपचार से हमारे शरीर की प्रिरेडिकल्‍स एंव टाक्‍सीन आसानी से निकल जाती है इससे त्‍वचा पर झुरूरीया नही पडती साथ ही त्‍वचा स्निग्‍ध मुलाय हो जाती है । ची नी शॉग उपचार से हमारे शरीर की सर्विसिंग हो जाती है ।  प्राकृतिक उपायों में रसेदार भोजन व ताजे फल तथा अधिक पानी पीने एंव व्‍यायाम ,योगा आदि कर शरीर की ऊर्जा व मेटाबोलिक दर को बढायें ताकि शरीर से अव्‍यर्थ पदार्थ बाहर निकल जायें । मॉस पेशियों के अधिक इस्‍तेमाल से रक्‍त व लसिका सर्कुलेशन ठीक रहता है इससे पसीना अधिक आता है त्‍वचा डीटाक्सिफाई होती है एंव चर्बी कम हो जाती है ।    
    अरोमाथैरेपी :- मोटापा घटाने या कम करने में अरोमाथैरेपी के आयल भी उपयोगी है । मिसाज के लिये रोजमेरी फेनल ,असेशियल आयल में दो तीन बूद थोडा सा बादाम का तेल मिलाकर इसे मेन नर्व जो शरीर व अंगों के मध्‍य लाईन पर मौजूद होते है इसे इस्‍टूमुलेट (उत्‍तेजित) करने से शरीर व कोशिकाओं के मेटाबोलिक दर व ऊर्जा की खपत बढती है  एंव शरीर से अत्‍याधिक पसीना निकलता है । इससे शरीर का टॉक्सिन पानी पसीने के माध्‍यम से बाहर आने लगता है जो कि शरीर का मोटापा कर करता है । पेट पर मोटापा कम करने एंव चबी घटाने के प्रमुख छै: पाईन्‍ट है । जिसका विवरण एक्‍युपंचर चिकित्‍सा में किया गया है । मोटापा कम करने व चर्बी को घटाने एंव मेटाबोलिक दर को बढाने के ये छै: प्रमुख बिन्‍दू है जिसका प्रयोग एक्‍युपंचर ,नेवल एक्‍युपंचर के साथ ची नी शॉग उपचार तथा एक्‍युप्रेशन चिकित्‍सा पद्धतियों के साथ मिसाज थैरापी में किया जाता है । उक्‍त पाईन्‍ट सम्‍पूर्ण शरीर के मोटर नर्व को कवर करते है ,इसीलिये यंत्र निर्माताओं ने मोटापा कम करने व नर्व को इस्‍टुमूलेट करने हेतु कुछ इस प्रकार के यंत्र करने हेतु कुछ इस प्रकार के यंत्रों का निर्माण किया है जिसमें उक्‍त पाईन्‍ट को दबाब देने व स्‍टुमूलेट करने की व्‍यवस्‍था रहती जैसे बटर फलाई एड ,स्‍लीम सोना बेल्‍ट आदि ,बटर फलाई तितली के आकार का छोटा सा यंत्र होता है इसमें पेट पर चिपका देते है इसके स्‍वीच को चालू करने से मशीन में बायबरेशन होता है यह बायबरेशन प्रमुख नर्व केन्‍द्र को उत्‍तेजित करते है इससे शरीर में ऊर्जा की खपत बढती है व शरीर के टाक्‍सीन पसीने के द्वारा बाहर निकलने लगते है । शरीर के इस प्रमुख बिन्‍दूओं को इस्‍टीमुलेट करने के कई तरीके प्रचलन में है । 
एन्‍टी आक्‍सीडेंटस :- एन्‍टी आक्‍सीडेंटस हमारे शरीर को फ्री रेडिकल्‍स से बचाव करता है ,फ्री रेडिकल्‍स एक ऐसा तत्‍व है ,जो शरीर के कोशिकाओं के आक्‍सीकरण क्रिया के बाद बेकार (अव्‍यर्थ पदार्थ) बचा रहता है । शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इसे शरीर से बाहर निकालने का प्रयास करती रहती है ,परन्‍तु इसके बाद भी फ्रीरेडिकल्‍स शरीर में बच रहते है ,इनके जमने से शरीर की अन्‍य कोशिकाओं के कार्यो में अनावश्‍यक अवरोध उत्‍पन्‍न होता है ,मृत सेल्‍स शरीर से बाहर नही निकल पाते ,नये सेल्‍स का निमार्ण अवरूद्ध हो जाता है इससे अन्‍य व्‍यर्थ पदार्थ शरीर से बाहर नही निकल पाते । वैज्ञानिकों का मानना है कि इसी फ्रीरेडिकल्‍स की वजह से वृद्धावस्‍था होती है । त्‍वचा व मॉसमेशियों में झुरूरीयॉ उत्‍पन्‍न होने लगती है । एण्‍टी आक्‍सीडेंटस को रोका जा सकता है ,सैल्‍युलाईट ट्रीटमेन्‍ट से मॉसपेशियों में जमने बाले ब्‍यर्थ पदार्थो व फ्रीरेडिकल्‍स को बाहर निकालने की कई प्राकृतिक विधियॉ प्रचलन में है । सौंर्द्धय उपचार में इनका प्रयोग सदियों से होता आया है कुछ लोगों में यह गलत धारण है कि सैल्‍युलाईट उपचार से केवल मोटापा कम किया जाता है । परन्‍तु ऐसा नही है कि इसका उपचार से त्‍वचा का ढीलापन उसकी झुरूरीयॉ तथा त्‍वचा की स्‍वाभाविकता को लम्‍बे समय तक कायम रखा जा सकता है ।                                                 

पेट का अनावश्‍यक मोटापा

                     पेट का अनावश्‍यक मोटापा
     
जापान ,चीन एंव अन्‍य पश्चिमी देशों में प्राकृतिक चिकित्‍सकों द्वारा पेट के अनावश्‍यक मोटापे को कम करने के लिये कई विधियॉ अपनाई जाती है । उनमें से प्रमुख है पेट पर आडी रेखा में नाभी के बीचों बीच से होते हुऐ एक नाडे या इलैस्टिक को बॉधना प्रमुख है । यह विधि चीन , जापान व अन्‍य पश्चिमी राष्‍ट्रों में काफी प्रचलित है । कई मिसाज उपचारकर्ताओं द्वारा पेट के मिसाज विधि से भी पेट के मोटापे को कम किया जाता है । सेल्‍युलाइट वसा कोशिकाओं की परते होती है , ये त्‍वचा के नीचे पाये जाने वाले उन ऊतकों में पायी जाती है ,जो अन्‍य ऊतकों व अंगों को सहारा देती है और जोडती है । यह वसा अधिकतर महिलाओं के जांधो व नितम्‍बों पर जमा होती है । ऐसे पुरूष तथा महिलाये जो सामान्‍यत: अरामतलब जिन्‍दगी बसर करती है उनके पेट पर अनावश्‍यक चर्बी के जमने के कारण पेट पर अनावश्‍यक मोटापा देखा जाता है । पेट के मोटापा को बिना किसी दबा दारू के कम करने की यह विधि काफी कारगर साबित हुई है । इस उपचार विधि का प्रयोग प्राकृतिक उपचारकर्ताओं द्वारा बडे ही विश्‍वास के साथ किया जा रहा है जिसके बडे ही आशानुरूप परिणाम भी मिले है । जन सामान्‍य स्‍वंय इस उपचार विधि का प्रयोग कर उचित परिणाम प्राप्‍त कर सकते है ।

विधि:- पेट के अनावश्‍य मोटापे को कम करने के लिये आप को एक नाडा या आज कल बाजारों में रबड या इलैस्टिक मिलती है उसे नाभी से पेट पर आडी रेखा में बॉधना है । इसके नाभी से पेट पर आडी रेखा में बॉधने का मूल उदेश्‍य यह है कि इसे इतना दबाब देते हुऐ बॉधे ताकि पेट पर किसी प्रकार की परेशानी न हो पेट पर पाये जाने वाले एस टी-25 बिन्‍दू इस दबाब की वजह से सक्रिय हो जाते है । एक्‍युपंचर चिकित्‍सक इस एसटी-25 पाईट पर एक्‍युपंचर की बारीक सूईयॉ चुभा कर उपचार करते है एक्‍युप्रेशर चिकित्‍सक इस पाईन्‍ट पर गहरा दबाब देकर पेट के अनावश्‍यक मोटापा को कम करते है । पेट व नाभी से आडी रेखा में नाडे के दबाब से पेट की अनावश्‍यक चर्बी धीरे धीरे कम होने लगती है इस नाडे को पेट पर लम्‍बे समय तक बॉधे रहना है इसे तीन माह से छै: माह तक बॉधने से उचित परिणाम मिलने लगते है । पेट की चर्बी कम हो जाती है एंव पेट स्‍लीम सुन्‍दर शरीर के अनुपात में आ जाता है आप भी इस सरल प्राकृतिक विधि को अपना कर अपने पेट के अनावश्‍यक मोटापे से निजात पा सकते है । 

Monday, 10 July 2017

संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये मध्‍य प्रदेश

         
 फर्जी चिकित्‍कों /झोला छाप डॉक्‍टरों के खिलाप कार्यवाही मध्‍यप्रदेश स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये का आदेश 





              संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये
                       मध्‍य प्रदेश
क्रमाक/ अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल दिनांक 26-8-2011
 प्रति,
  1- समस्‍त कलेक्‍टर
      मध्‍यप्रदेश
 2- समस्‍त जिला पुलिस अधिक्षक
    मध्‍यप्रदेश
विषय:- फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों /मध्‍यप्रदेश में चिकित्‍सा व्‍यवसाय कर रहे अन्‍य राज्‍य में पंजीकृत फजी चिकित्‍सकों के विरूद्ध कार्यवाही ।
सर्न्‍दभ :- संचालनालय का पत्र क्रमाक /अप्रशा/सेल-4/ 08/एफ-292/1044/दिनाक 25-02-2008
        प्रदेश में अपात्र फर्जी चिकित्‍सकों,अन्‍य प्रदेशों में पंजीकृत किन्‍तु मध्‍यप्रदेश में अमान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों झोला छाप चिकित्‍सकों द्वारा रोगियों का उपचार किया जा रहा है अधिकाश ऐसे चिकित्‍सक एलोपैथी पद्धति की औषधिया रोगियों को दे रहे है । बिना उपयुक्‍त ज्ञान के इस प्रकार का उपचार घातक होता है । एसे कई प्रकारण सामने आये है जहां अपात्र फजी चिकित्‍सको द्वारा गलत इंजेक्‍शन देने से रोगियों को एब्‍सेस गैगरीन आदि हो गया है । जिससे
तथा गलत इंजेक्‍शन के रियेक्‍शन से रोगियों की मृत्‍यु भी हो गई है ।
 उपरोक्‍त तथ्‍यों एंव समय समय पर माननीय उच्‍च्‍ा न्‍यायालय के आदेशो के पालनमें संदर्भित पत्र क्रमाक 1044 दिनांक 20;02;2008 द्वारा विभिन्‍न मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों पर चर्चा करते हुऐ फजी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों आदि पर विभिन्‍न चिकित्‍सा रेग्‍यूलेट्री प्रावधनो के अन्‍तर्गत कार्यवाही हेतु दिशा निर्देश जारी किये गये थे किन्‍तु प्रदेश में अवैध चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर कोई ठोस कार्यवाही नही की गई है । माननीय मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा भी अवैध चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर चिन्‍ता व्‍यक्‍त करते हुऐ प्रकरण क्रमाका486/छिदवाडा/10 में निम्‍न अहनुशसा की गयी है ।
 जितने भी तथाकथित डॉक्‍टर पाये जावे,जिनके पास कोई डिग्री नही है उनके विरूद्ध कठोरता पूर्वक एंव गंभीरता पूर्वक कार्यवाही की जावे, ताकि व्‍यक्यिों को उनके द्वारा किये जाने वाले इलाज से कोई क्षति न हो
  उपरोक्‍त के संदर्भ में अपात्र व्‍यक्तियों द्वारा किये जा रहें  चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने के लिये विधि अनुसार निम्‍न प्रावधान उपलब्‍ध है ।
1-मध्‍यप्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संब‍धी स्‍थापनाए(रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)
अधिनियम 1973 की धारा-3 कें प्रावधान अनुसार निजी क्षेत्र के समस्‍त उपचार्यागृह या रूजोपाचार संबधी स्‍थापना (नर्सिग होम/ निजी चिकित्‍साल/परामर्श केन्‍द्र ,औषधालय,प्रयोगशाला,एक्‍सरे,डेन्‍टल क्‍लीनिक सहित सभी क्‍लीनिक इस्‍टेब्लेश्‍मेन्‍ट उक्‍त एक्‍ट के अर्न्‍तगत रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञप्ति के बिना खोले जा सकते है न रखे जा सकते है और न चलाये जा सकते है ।
    उक्‍त धारा-3 के उल्‍लधन करने पर अधिनियम 1973 की धारा -8(क)(एक)तथा (दो)के अर्न्‍तगत जुर्माने तथा 3 माहतक के कठोर कारावास का प्रावधान है ।
     
    मध्‍यप्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संब‍धी स्‍थापनाए (रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)
अधिनियम 1973 के अर्न्‍तगत विधि अनुसार केवल निम्‍न मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों के अर्न्‍तगत कार्यरत क्‍लीनिक इस्‍टेब्लेश्‍मेन्‍ट / नर्सिग होम आदि के पंजीयन का प्रावधान है :-
    अ- आधुनिक चिकित्‍सा पद्धति एलोपैथी :- इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍वसाय हेतु मेडिकल काडन्सिल ऑफ इंडिया एक्‍ट 1956 की धारा 15(1)के अर्न्‍तगत मान्‍य अर्हताधारी का मध्‍यप्रदेश मेडिकल काउसिन्‍सल अधिनियम 1987 के अर्न्‍तगत पंजीयन अनुवार्य है ।
  ब- भारतीय चिकित्‍सा पद्धति :-इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु मध्‍यप्रदेश आयुर्वेद यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी अधिनियम 1970 के अर्न्‍तगत शेडयूल में उल्‍लेखित मान्‍य अर्हताधारी का बोर्ड ऑफ आयुर्वेदिक एण्‍ड यूनानी सिस्‍टम ऑफ मेडिसिन एण्‍ड नेचुरोपैथी मध्‍यप्रदेश के अर्न्‍तगत पंजीयन अनिवार्य है ।
 स- होम्‍योपैथी एण्‍ड बायोकेमिक सिस्‍टम ऑफ मेडिसन :- इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु होम्‍योपैथी सेन्‍ट्रल काउसिन्‍ल एक्‍ट 1973 की दूसरी/ तीसरी अनुसूची में मान्‍य अर्हताधारी का स्‍टेट काउन्सिल ऑफ होम्‍योपैथी मध्‍यप्रदेश के अर्न्‍तगत पंजीयन अनिवार्य है ।
2- चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था (नियंत्रण) अधिनियम 1973 की धारा-7 ग के अनुसार अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग केवल उपरोक्‍त मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों में रजिर्स्‍टड मेडिकल प्रेक्‍टीश्‍नर ही कर सकते है । अपात्र व्‍यक्ति द्वारा उक्‍त अभिधान का उपयोग चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था नियत्रण अधिनियम 1973 की धारा 8(2) के अर्न्‍तगत 3 वर्ष कारावास या रूपये 50000 जुर्माने या दोनो से दण्‍डनीय होगा ।
3-ऐलोपैथी चिकित्‍सा पत्द्धति में केवल वे ही चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु पात्र है जो मेडिकल काउन्सिल आफ इंडिया एक्‍ट 1956 की धारा 15(1) में उल्‍लेखित अर्हता धारी होकर मध्‍य प्रदेश मेडिकल काउन्सिल एक्‍ट 1987 के अन्‍तर्गत पंजीकृत हो । अपाऋ एंव अपजीकृत व्‍यक्तियों द्वारा ऐलोपैथिक चिकित्‍सा पत्द्धति में चिकित्‍सा व्‍यवसाय करने पर मध्‍यप्रदेश मेडिकल काउन्सिल एक्‍ट 1987 की धरा 24 के अर्न्‍तगत 3 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा 50000 रू तक जुर्माने का प्रावधान है ।
 4-इलेक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक /आल्‍टर्नेटिव मेडिसिन देश के विधान अनुसार स्‍थापित चिकित्‍सा पद्धति नही है इन पद्धतियों के व्‍यवसाईयों हेतु माननीय उच्‍च न्‍यायालय पश्चिम बंगाल,मध्‍यप्रदेश तथा दिल्‍ली द्वारा इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही न किये जाने संबधी निर्देश है ।किन्‍तु इन पद्धतियों के चिकित्‍सा व्‍यवसायी केवल अपनी पद्धति में ही चिकित्‍सा व्‍यवसाय कर सकते है । याचिका क्रमाक 502 /99 (डॉ0मुकेश श्रीवास्‍तव विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन ) 2957/94 (काउन्सिल आफ आल्‍टरनेटिव सिस्‍टम विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन )2018/92(नेशनल उब्‍हलप्‍मेन्‍ट सोसायटी आफ इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपै‍थी विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन ) एंव अन्‍य याचिकाओं में पारित आदेश दिनांक 19-03-1999 के पैरा 10 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर द्वारा इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टर्नेटिव मेडिसन अर्हता धारीयों के लिये निम्‍न व्‍यवस्‍था जारी की गई है ।
 क्‍योकि इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टर्नेटिव मेडिसिन अर्हताधारी मान्‍य पद्धतियो के अर्न्‍तगत अर्हताधारी नही है माननीय उच्‍च न्‍यायालय के उपरोक्‍त आदेशानुसार इनको यद्यपि इनकी विधा में चिकित्‍सा व्‍यवसाय की पात्रता है :-
(1) इनका पंजीयन मध्‍यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबधी स्‍थापनाए (रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन ) अधिनियम 1973 के अर्न्‍तगत नही किया जाना है किन्‍तु उक्‍त अधिनियम की धारा 8 के अर्न्‍तगत इन पर कोई कार्यवाही भी नही की जायेगी ।
(2)इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टनेटिव मेडिसिन अर्हताधारी अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग करने हेतु पात्र नही है यदि यह अर्हताधारी अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग करते है तो उपरोक्‍त पैरा-2 में प्रावधानानुसार इनके विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जाए (याचिका क्रमाक 7352/07 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर का आदेश दिनांक 22-07-2010
    कृपया आपके नेतृत्‍व में जिले में डिप्‍टी कलेक्‍टर उप पुलिस अधीक्षक तथा मुख्‍य चिकित्‍सा एंव स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी पर आधारित एक दल का गठन कर अभियान चलाकर फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों की पहचान कर उपरोक्‍त प्रावधान अनुसार प्रभावी कार्यावाही कर इन अपात्र व्‍यक्तियों द्वारा किये जा रहे चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने की कार्यावाही करे । कृपया प्रकरण में आवश्‍यक कार्यवाही कर 30 दिवस की अवधि में पालन प्रतिवेदन भेजना सुनिश्चित करे ।
                                                    आयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य
                                                      मध्‍यप्रदेश


पृ0क्रमाक/  अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल/    दिनांक 26-8-2011
प्रतिलिपि-
1-        अपर मुख्‍य सचिव गृह विभाग मध्‍यप्रदेश शासन मंत्रालय बल्‍लभ भवन की ओर भेजकर निवेदन है कि कृपया गृह विभाग से भी आवश्‍यक दिशा निर्देश जारी करना चाहेगे ।
2-        प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पर्यावास भवन खण्‍ड 1भोपाल की ओर उनके क्रमाक 821/माअआ/अनु/ 446/छिदवाडा/ 2011दिनांक18-04-2011 के सर्न्‍दभ में सूचनार्थ ।
3-        प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश शासन लोक स्‍वास्‍थ एंव परिवार कल्‍याण विभाग की ओर क्रमाक 842/ 672/2011/मेडी-2/1-दिनांक 05-07-2011 के सर्न्‍दभ में सूचनार्थ ।
3-
4-        पुलिस महानिर्देशक पुलिस मुख्‍यालय जहांगीराबाद भोपाल की ओर सूचनार्थ एंव आवश्‍यक कार्यवाही हेतु
4-
5-        अपर संचालक (प्रशासन)स्‍थानीय कार्याल की ओर क्रमाक 4/शिका/स्‍पेसल/2011/1571दिनांक 21-07-2011 के सर्न्‍दभ्‍ा में सूचनार्थ ।
6-        संभागीय संयुक्‍त संचालक स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें भोपाल ,इन्‍दौर ,उज्‍जैन,ग्‍वालियर,जबलपुर,सागर तथा रीवा की ओर सूचनाथ एंव आवश्‍यक कार्यवाही हेतु
7-        समस्‍त मुख्‍य चिकित्‍सा एंव स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी मध्‍यप्रदेश की ओर भेजकर निर्देश दिये जाते है कि  जिला कलेक्‍टर एंव पुलिस अधिक्षक से सम्‍पर्क कर फर्जी चिकित्‍सकों द्वारा चलाये जा रहे चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने हेतु उपरोक्‍तानुसार कार्यवाही एक मिशन के रूप में करे ।
8-        श्री थामस,कम्‍प्‍यूटर कक्ष ,स्‍थानीय कार्यालय की ओर भेजकर इसको विभागीय वेब साइट पर प्रर्दर्शित करे ।
9-        आदेश फाईल ।


                                                     आयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य

                                                        मध्‍यप्रदेश

फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों के खिलाप संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये मध्‍यप्रदेश का आदेश

          फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों के खिलाप संचालनालय  स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये मध्‍यप्रदेश का आदेश 
          संचालनालय स्‍वास्‍थ्‍य सेवाये
                  मध्‍य प्रदेश
क्रमाक/ अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल दिनांक 26-8-2011
 प्रति,
  1- समस्‍त कलेक्‍टर
      मध्‍यप्रदेश
 2- समस्‍त जिला पुलिस अधिक्षक
    मध्‍यप्रदेश
विषय:- फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों /मध्‍यप्रदेश में चिकित्‍सा व्‍यवसाय कर रहे अन्‍य राज्‍य में पंजीकृत फजी चिकित्‍सकों के विरूद्ध कार्यवाही ।
सर्न्‍दभ :- संचालनालय का पत्र क्रमाक /अप्रशा/सेल-4/ 08/एफ-292/1044/दिनाक 25-02-2008
        प्रदेश में अपात्र फर्जी चिकित्‍सकों,अन्‍य प्रदेशों में पंजीकृत किन्‍तु मध्‍यप्रदेश में अमान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों झोला छाप चिकित्‍सकों द्वारा रोगियों का उपचार किया जा रहा है अधिकाश ऐसे चिकित्‍सक एलोपैथी पद्धति की औषधिया रोगियों को दे रहे है । बिना उपयुक्‍त ज्ञान के इस प्रकार का उपचार घातक होता है । एसे कई प्रकारण सामने आये है जहां अपात्र फजी चिकित्‍सको द्वारा गलत इंजेक्‍शन देने से रोगियों को एब्‍सेस गैगरीन आदि हो गया है । जिससे
तथा गलत इंजेक्‍शन के रियेक्‍शन से रोगियों की मृत्‍यु भी हो गई है ।
 उपरोक्‍त तथ्‍यों एंव समय समय पर माननीय उच्‍च्‍ा न्‍यायालय के आदेशो के पालनमें संदर्भित पत्र क्रमाक 1044 दिनांक 20;02;2008 द्वारा विभिन्‍न मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों पर चर्चा करते हुऐ फजी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों आदि पर विभिन्‍न चिकित्‍सा रेग्‍यूलेट्री प्रावधनो के अन्‍तर्गत कार्यवाही हेतु दिशा निर्देश जारी किये गये थे किन्‍तु प्रदेश में अवैध चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर कोई ठोस कार्यवाही नही की गई है । माननीय मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग द्वारा भी अवैध चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर चिन्‍ता व्‍यक्‍त करते हुऐ प्रकरण क्रमाका486/छिदवाडा/10 में निम्‍न अहनुशसा की गयी है ।
 जितने भी तथाकथित डॉक्‍टर पाये जावे,जिनके पास कोई डिग्री नही है उनके विरूद्ध कठोरता पूर्वक एंव गंभीरता पूर्वक कार्यवाही की जावे, ताकि व्‍यक्यिों को उनके द्वारा किये जाने वाले इलाज से कोई क्षति न हो
  उपरोक्‍त के संदर्भ में अपात्र व्‍यक्तियों द्वारा किये जा रहें  चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने के लिये विधि अनुसार निम्‍न प्रावधान उपलब्‍ध है ।
1-मध्‍यप्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संब‍धी स्‍थापनाए(रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)
अधिनियम 1973 की धारा-3 कें प्रावधान अनुसार निजी क्षेत्र के समस्‍त उपचार्यागृह या रूजोपाचार संबधी स्‍थापना (नर्सिग होम/ निजी चिकित्‍साल/परामर्श केन्‍द्र ,औषधालय,प्रयोगशाला,एक्‍सरे,डेन्‍टल क्‍लीनिक सहित सभी क्‍लीनिक इस्‍टेब्लेश्‍मेन्‍ट उक्‍त एक्‍ट के अर्न्‍तगत रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञप्ति के बिना खोले जा सकते है न रखे जा सकते है और न चलाये जा सकते है ।
    उक्‍त धारा-3 के उल्‍लधन करने पर अधिनियम 1973 की धारा -8(क)(एक)तथा (दो)के अर्न्‍तगत जुर्माने तथा 3 माहतक के कठोर कारावास का प्रावधान है ।
     
    मध्‍यप्रदेश उपचार्यागृह तथा रूजोपचार संब‍धी स्‍थापनाए (रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन)
अधिनियम 1973 के अर्न्‍तगत विधि अनुसार केवल निम्‍न मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों के अर्न्‍तगत कार्यरत क्‍लीनिक इस्‍टेब्लेश्‍मेन्‍ट / नर्सिग होम आदि के पंजीयन का प्रावधान है :-
    अ- आधुनिक चिकित्‍सा पद्धति एलोपैथी :- इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍वसाय हेतु मेडिकल काडन्सिल ऑफ इंडिया एक्‍ट 1956 की धारा 15(1)के अर्न्‍तगत मान्‍य अर्हताधारी का मध्‍यप्रदेश मेडिकल काउसिन्‍सल अधिनियम 1987 के अर्न्‍तगत पंजीयन अनुवार्य है ।
  ब- भारतीय चिकित्‍सा पद्धति :-इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु मध्‍यप्रदेश आयुर्वेद यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्‍सा व्‍यवसायी अधिनियम 1970 के अर्न्‍तगत शेडयूल में उल्‍लेखित मान्‍य अर्हताधारी का बोर्ड ऑफ आयुर्वेदिक एण्‍ड यूनानी सिस्‍टम ऑफ मेडिसिन एण्‍ड नेचुरोपैथी मध्‍यप्रदेश के अर्न्‍तगत पंजीयन अनिवार्य है ।
 स- होम्‍योपैथी एण्‍ड बायोकेमिक सिस्‍टम ऑफ मेडिसन :- इसके अर्न्‍तगत चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु होम्‍योपैथी सेन्‍ट्रल काउसिन्‍ल एक्‍ट 1973 की दूसरी/ तीसरी अनुसूची में मान्‍य अर्हताधारी का स्‍टेट काउन्सिल ऑफ होम्‍योपैथी मध्‍यप्रदेश के अर्न्‍तगत पंजीयन अनिवार्य है ।
2- चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था (नियंत्रण) अधिनियम 1973 की धारा-7 ग के अनुसार अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग केवल उपरोक्‍त मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों में रजिर्स्‍टड मेडिकल प्रेक्‍टीश्‍नर ही कर सकते है । अपात्र व्‍यक्ति द्वारा उक्‍त अभिधान का उपयोग चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था नियत्रण अधिनियम 1973 की धारा 8(2) के अर्न्‍तगत 3 वर्ष कारावास या रूपये 50000 जुर्माने या दोनो से दण्‍डनीय होगा ।
3-ऐलोपैथी चिकित्‍सा पत्द्धति में केवल वे ही चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु पात्र है जो मेडिकल काउन्सिल आफ इंडिया एक्‍ट 1956 की धारा 15(1) में उल्‍लेखित अर्हता धारी होकर मध्‍य प्रदेश मेडिकल काउन्सिल एक्‍ट 1987 के अन्‍तर्गत पंजीकृत हो । अपाऋ एंव अपजीकृत व्‍यक्तियों द्वारा ऐलोपैथिक चिकित्‍सा पत्द्धति में चिकित्‍सा व्‍यवसाय करने पर मध्‍यप्रदेश मेडिकल काउन्सिल एक्‍ट 1987 की धरा 24 के अर्न्‍तगत 3 वर्ष तक के कठोर कारावास तथा 50000 रू तक जुर्माने का प्रावधान है ।
 4-इलेक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक /आल्‍टर्नेटिव मेडिसिन देश के विधान अनुसार स्‍थापित चिकित्‍सा पद्धति नही है इन पद्धतियों के व्‍यवसाईयों हेतु माननीय उच्‍च न्‍यायालय पश्चिम बंगाल,मध्‍यप्रदेश तथा दिल्‍ली द्वारा इनके विरूद्ध कोई कार्यवाही न किये जाने संबधी निर्देश है ।किन्‍तु इन पद्धतियों के चिकित्‍सा व्‍यवसायी केवल अपनी पद्धति में ही चिकित्‍सा व्‍यवसाय कर सकते है । याचिका क्रमाक 502 /99 (डॉ0मुकेश श्रीवास्‍तव विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन ) 2957/94 (काउन्सिल आफ आल्‍टरनेटिव सिस्‍टम विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन )2018/92(नेशनल उब्‍हलप्‍मेन्‍ट सोसायटी आफ इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपै‍थी विरूद्ध मध्‍यप्रदेश शासन ) एंव अन्‍य याचिकाओं में पारित आदेश दिनांक 19-03-1999 के पैरा 10 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर द्वारा इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टर्नेटिव मेडिसन अर्हता धारीयों के लिये निम्‍न व्‍यवस्‍था जारी की गई है ।
 क्‍योकि इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टर्नेटिव मेडिसिन अर्हताधारी मान्‍य पद्धतियो के अर्न्‍तगत अर्हताधारी नही है माननीय उच्‍च न्‍यायालय के उपरोक्‍त आदेशानुसार इनको यद्यपि इनकी विधा में चिकित्‍सा व्‍यवसाय की पात्रता है :-
(1) इनका पंजीयन मध्‍यप्रदेश उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबधी स्‍थापनाए (रजिस्‍ट्रीकरण तथा अनुज्ञापन ) अधिनियम 1973 के अर्न्‍तगत नही किया जाना है किन्‍तु उक्‍त अधिनियम की धारा 8 के अर्न्‍तगत इन पर कोई कार्यवाही भी नही की जायेगी ।
(2)इलेक्‍ट्रोहोम्‍योपैथी / आल्‍टनेटिव मेडिसिन अर्हताधारी अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग करने हेतु पात्र नही है यदि यह अर्हताधारी अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग करते है तो उपरोक्‍त पैरा-2 में प्रावधानानुसार इनके विरूद्ध दण्‍डात्‍मक कार्यवाही की जाए (याचिका क्रमाक 7352/07 में माननीय उच्‍च न्‍यायालय जबलपुर का आदेश दिनांक 22-07-2010
    कृपया आपके नेतृत्‍व में जिले में डिप्‍टी कलेक्‍टर उप पुलिस अधीक्षक तथा मुख्‍य चिकित्‍सा एंव स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी पर आधारित एक दल का गठन कर अभियान चलाकर फर्जी चिकित्‍सकों /झोला छाप डॉक्‍टरों की पहचान कर उपरोक्‍त प्रावधान अनुसार प्रभावी कार्यावाही कर इन अपात्र व्‍यक्तियों द्वारा किये जा रहे चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने की कार्यावाही करे । कृपया प्रकरण में आवश्‍यक कार्यवाही कर 30 दिवस की अवधि में पालन प्रतिवेदन भेजना सुनिश्चित करे ।
                                                    आयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य
                                                      मध्‍यप्रदेश


पृ0क्रमाक/  अ प्र शा /सेल-6 /एफ-292/ 2011/1084 भोपाल/    दिनांक 26-8-2011
प्रतिलिपि-
1-        अपर मुख्‍य सचिव गृह विभाग मध्‍यप्रदेश शासन मंत्रालय बल्‍लभ भवन की ओर भेजकर निवेदन है कि कृपया गृह विभाग से भी आवश्‍यक दिशा निर्देश जारी करना चाहेगे ।
2-        प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग पर्यावास भवन खण्‍ड 1भोपाल की ओर उनके क्रमाक 821/माअआ/अनु/ 446/छिदवाडा/ 2011दिनांक18-04-2011 के सर्न्‍दभ में सूचनार्थ ।
3-        प्रमुख सचिव मध्‍यप्रदेश शासन लोक स्‍वास्‍थ एंव परिवार कल्‍याण विभाग की ओर क्रमाक 842/ 672/2011/मेडी-2/1-दिनांक 05-07-2011 के सर्न्‍दभ में सूचनार्थ ।
3-
4-        पुलिस महानिर्देशक पुलिस मुख्‍यालय जहांगीराबाद भोपाल की ओर सूचनार्थ एंव आवश्‍यक कार्यवाही हेतु
4-
5-        अपर संचालक (प्रशासन)स्‍थानीय कार्याल की ओर क्रमाक 4/शिका/स्‍पेसल/2011/1571दिनांक 21-07-2011 के सर्न्‍दभ्‍ा में सूचनार्थ ।
6-        संभागीय संयुक्‍त संचालक स्‍वास्‍थ्‍य सेवायें भोपाल ,इन्‍दौर ,उज्‍जैन,ग्‍वालियर,जबलपुर,सागर तथा रीवा की ओर सूचनाथ एंव आवश्‍यक कार्यवाही हेतु
7-        समस्‍त मुख्‍य चिकित्‍सा एंव स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी मध्‍यप्रदेश की ओर भेजकर निर्देश दिये जाते है कि  जिला कलेक्‍टर एंव पुलिस अधिक्षक से सम्‍पर्क कर फर्जी चिकित्‍सकों द्वारा चलाये जा रहे चिकित्‍सा व्‍यवसाय पर अंकुश लगाने हेतु उपरोक्‍तानुसार कार्यवाही एक मिशन के रूप में करे ।
8-        श्री थामस,कम्‍प्‍यूटर कक्ष ,स्‍थानीय कार्यालय की ओर भेजकर इसको विभागीय वेब साइट पर प्रर्दर्शित करे ।
9-        आदेश फाईल ।


                                                     आयुक्‍त स्‍वास्‍थ्‍य

                                                        मध्‍यप्रदेश

Thursday, 24 November 2016

इलैक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक की मान्‍यता के रास्‍ते में रोडा

         इलैक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक की मान्‍यता के रास्‍ते में रोडा  
    यह बहुत ही दु:ख का विषय है कि इलैक्‍ट्रोहोम्‍योपैथिक जैसी सरल एंव उपयोगी चिकित्‍सा पद्धति अपने अधिकारों को प्राप्‍त न कर सकी । इस चिकित्‍सा पत्द्धति के हजारों लाखों छात्रों एंव चिकित्‍सकों का भविष्‍य अंधकार में है । इस चिकित्‍सा पद्धति के शैक्षणिक संस्‍थाओं एंव चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु पंजियन करने बाले संचालकों द्वारा अपने स्‍वार्थपूर्ति हेतु विभिन्‍न न्‍यायालयों की शरण लेकर सशर्त स्‍ट्रे तो कभी शैक्षणिक संस्‍थाओं पर आरोप प्रत्‍यारोप एंव यह कहना कि भारत में केवल हमारी ही संस्‍था को संचालन का आदेश न्‍यायालय ने दिया है अत: हमारी संस्‍था ही मान्‍यता प्राप्‍त है, अन्‍य संस्‍थाये नही । देश के विभिन्‍न न्‍यायलयों द्वारा दिये गये निर्णय हो, या आदेश, सभी अभी आधे अधूरे ही है, इसका कारण यह है कि किसी भी इलै0हो0 शैक्षणिक संस्‍था या बोर्ड आदि को किसी न किसी शर्त के तहत ही इस प्रकार के आदेश दिये गये है । जैसे डिग्री व डिप्‍लोमा आदि प्रदाय करने का अधिकार उन्‍हे नही होगा वे केवल सार्टिफिकेट कोर्स का संचालन कर सकते है । डिग्री ,डिप्‍लोमा देने का अधिकार यूनिवरसिट को है । इसी प्रकार से एक आदेश और प्रसारित हुआ है जिसमें इलैक्‍ट्रोहोम्‍योपै‍थिक चिकित्‍सको को डॉक्‍टर लिखने का अधिकार नही है । यदि इले0होम्‍यो0चिकित्‍सक अपने नाम के साथ डॉ0 शब्‍द का प्रयोग करता है या करते हुऐ पाये जाता है तो उसे  चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था (नियंत्रण) अधिनियम 1973 की धारा-7 ग के अनुसार अभिधान डॉक्‍टर का उपयोग केवल उपरोक्‍त मान्‍य चिकित्‍सा पद्धतियों में रजिर्स्‍टड मेडिकल प्रेक्‍टीश्‍नर ही कर सकते है । अपात्र व्‍यक्ति द्वारा उक्‍त अभिधान का उपयोग चिकित्‍सा शिक्षा संस्‍था नियत्रण अधिनियम 1973 की धारा 8(2) के अर्न्‍तगत 3 वर्ष कारावास या रूपये 50000 जुर्माने या दोनो से दण्‍डनीय होगा
       परन्‍तु इसके बाद भी इसकी कई शैक्षणिक संस्‍थाओं एंव रजिस्‍ट्रेशन बोर्ड आदि ने अपना कारोबार यथावत रख डिग्री डिप्‍लोमा आदि प्रदाय करते रहे । इसी प्रकार की कई भ्रमित करने वाली स्थितियों के बीच छात्र व चिकित्‍सक उलक्षते रहे । इलेक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक की मान्‍यता का दम भरने बालों ने अपनी  झोलियॉ भरने के नये नये तरीके इस प्रकार से निकाले कि उनकी पॉचों अंगुलियॉ धी में और मुंह कढाई में थी । परन्‍तु नुकसान केवल और केवल इस पैथी के छात्रों व चिकित्‍सकों को उठाना पड रहा है । यहॉ पर यह बात अपनी जगह पर सर्वविदित है कि कोई भी चिकित्‍सा पद्धति अपने उदभव से ही मान्‍यता लेकर पैदा नही होती , किसी भी चिकित्‍सा पद्धति को मान्‍यता हेतु अपनी उपयोगिता या वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर मान्‍यतायें मिलती रही है । तथाकथित आयुर्वेद ,एंव होम्‍योपै‍‍थिक चिकित्‍सा पद्धतियॉ प्रारम्‍भ से ही मान्‍यता प्राप्‍त चिकित्‍सा पद्धतिया नही थी । आयुर्वेद को सन 1970 तथा होम्‍योपै‍थिक को सन 1973 में शासकीय मान्‍यतायें प्राप्‍त हुई है A आयुर्वेदिक हो या होम्‍योपै‍थिक हो इन्‍हे अपनी उपयोगिता को सिद्ध करने के बाद ही समय समय पर इन्‍हे मान्‍यतायें मिली है । परन्‍तु इसे र्दुभाग्‍य ही कहना होगा , कि इतने लम्‍बे अर्स के बाद भी इलैक्‍ट्रो होम्‍योपैथिक चिकित्‍सा को मान्‍यता नही मिली लाखों चिकित्‍सकों एंव छात्रों का भविष्‍य अंधकार में है ,परन्‍तु इसके संचालनकर्ताओं द्वारा आधे अधुरे निर्णयों का सहारा लेकर आज भी छात्रों व चिकित्‍सकों के साथ खुले आम खिलवाड किया जा रहा है । शासन भी मौन तमाशा देख रही है ,कुछ राज्‍यों की राजनैतिक पार्टीयों ने अपनी रोटी भी सेंकी ,इनका खूब जम कर इस्‍तमाल भी किया गया , चूंकि वे जानते है कि ये अच्‍छा वोट बैंक है , उल्‍टे सीधे आदेशों को तोड मरोड कर ,पेश करने वालों की कतार में अब राजनैतिक पाटीयॉ भी , भीड एकत्र कर बहुमत बटोर , वोट खीच की राजनीति कर रही है ।] चिकित्‍सा व्‍यवसाय अधिनियम लागू हो जाने के बाद प्रत्‍येक चिकित्‍सकों को जिला स्‍वास्‍थ्‍य अधिकारी के यहॉ अपने पंजियन तथा चिकित्‍सायल का पंजियन कराना अनुवार्य है , परन्‍तु इस अधिनियम के प्रावधानों के अर्न्‍तगत इलेक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक मान्‍यता प्राप्‍त नही है फिर इनके चिकित्‍सालयों का पंजियन सी0 एम0 ओ0 के यहा नही हो सकता , अर्थात ये चिकित्‍सा व्‍यवसाय करने हेतु कानून अमान्‍य है । इलैक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक का संरक्षण व मान्‍यता दिलाने का दम भरने वाली पार्टीयों ने कहॉ कि , हमने सी0 एम0 ओ0 के यहॉ पर एक अलग से इसके पंजियन का रजिस्‍ट्रर रखबा दिया है , इस प्रकार के भ्रमित करने वाले अश्‍वासनों से भ्रमित छात्र व चिकित्‍सक अपने आप को अकेला मुसीबतों से धिरा पाता है । ,तथाकथित कुछ संस्‍थाओं का यह दावा है कि उन्‍होने विश्‍वविद्यलयों से सम्‍बृद्धता ले रखी है , कुछ प्राईवेट विश्‍वविद्यलयों द्वारा जो सम्‍बृत्द्धता दी गयी है उसमें उन्‍होने स्‍पष्‍ट कर रखा है कि उक्‍त कोर्स चिकित्‍सा व्‍यवसाय हेतु मान्‍य न हो कर केवल ज्ञानवर्धन हेतु संचालित है , इस प्रकार के भ्रमित कारोबार से जुडे लोगों के बहकावे में न आकर इसके छात्रों एंव चिकित्‍सकों को चाहिये कि वे आपस में सोसल मीडिया या अन्‍य साधनों के माध्‍यम से एक दूसरे से जुडें एंव इसकी सच्‍चाई को अपने साथीयों के बीच शेयर करे तभी इस पैथी का उद्धार संभव है । आप सभी इलैक्‍ट्रो होम्‍योपै‍थिक चिकित्‍सको से निवेदन है कि हमारी बात जहॉ तक पहूंचे आप सभी इसे उन तक पहुचाने में इसे शेयर करे ,एंव शासन ,तथा विभिन्‍न न्‍यायालयों के आदेशों को स्‍केन कर सोसल मीडिया पर डालते रहे ताकि इस प्रकार की जानकारीयॉ सभी चिकित्‍सको तक समय समय पर पहूंचती रहे । चिकित्‍सा व्‍यवसाय अधिनियम की जानकारीयॉ हमने अपनी साईड पर दे रखी है चिकित्‍सक व छात्र हमारी साईड से इसे प्राप्‍त कर सकते है ।
 आप हमे कमेन्‍ट करे इस पैथी से सम्‍बन्धित न्‍यायलयों व शासन आदि के आदेश हम आप को आपके कमेन्‍ट पश्‍चात भेजने का हर संभव प्रयास करेगे ।

Tuesday, 24 May 2016

नि:शुल्क ब्युटी क्लिनिक कोर्स

                   नि:शुल्क ब्युटी क्लिनिक कोर्स   


क्या आप ब्युटी पर्लर चलाती है ? परन्तु उसमे लाभ कम हो रहा है , क्या आपको इसका कारण मालुम है? नही तो हम बतलाते है ,इस का मुख्य कारण है आज घरो घर से लेकर गली चोराहो तक ब्युटी पर्लरो का खुलते जाना है , इसलिये इसमे काम्टीशन बढा है । फिर
इसका दुसरा कारण है ब्युटी पर्लर मे सौंर्द्य समस्याओ का उपचार व नई नई जानकारीया इनके पास नही होती ,जबकी ब्युटी क्लिनिक मे इन सभी की जानकारीया उपलब्ध होती है । ब्युटी क्लिनिक मे  सौंर्द्य से समब्धित कई ऐसी समस्याये जैसे मस्से, मुहँसे ,अनावश्क  मोटापा , स्ट्रेचमार्क के निशान , एक निश्चित उम्र के बाद भी स्त्री सुलभ अंगो का विकसित न होना ,समय से पहले बालो का झडना या सफेद होना, गर्भावस्था के बाद पेट का बढना या लटक जाना  या पेट पर झुरीया पडना आदी । ब्युटी क्लिनिक मे इन सभी समस्याओ का उपचार उपलब्ध है । इसके अतरिक्त ब्युटी क्लिनिक
मे अत्याधुनिक फैशन की जानकारीया , जैसे पिर्यसिग ,टैटू ,बाडी आर्ट शरीर के अनावश्य क बालो को बी गम की सहयता से बिना र्द्द के निकालना आदि ।
ब्युटी क्लिनिक का कोर्स वो भी घर बैठे बिलकुल नि:शुल्क किया जा सकता है । आप इस की जानकारी इस मेल एडैस पर या इस साईड पर जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ उठा सकते है ।

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